कर्पूरी ठाकुर को याद करने में कंजूसी क्यों !

आज सामजिक न्याय के पितृपुरुष कर्पूरी ठाकुर की जयंती है. कई जगह आज इस अवसर पर कार्यक्रम भी हो रहे हैं. लेकिन जो उत्साह इन कार्यक्रमों में दिखना चाहिए, वैसा दिख नहीं रहा है. सामाजिक न्याय के जिस रथ का पहिया पहली बार कर्पूरी ठाकुर ने खिंचा था. उन्होंने जाति की राजनीति कभी नहीं की, राजनीतिक और सामाजिक गैर-बराबरी के खिलाफ जिन्दगी भर लोगों को गोलबंद करते रहे. ऐसे में उन्हें याद करने में इतनी कंजूसी क्यों! बिहार और झारखण्ड में जो भी बड़े पिछड़े नेता हैं, वो इसलिए अपने समाज और राज्य का नेतृत्व कर पा रहे हैं, क्योंकि पिछड़े समाज के महानायक कर्पूरी ठाकुर ने उन्हें गैर बराबरी के खिलाफ लड़ने का फार्मूला बताया था.

फिर भी कई जगह कर्पूरी ठाकुर की याद में कई कार्यक्रम हुए. रांची में आजसू अध्यक्ष के आवासीय कार्यालय में कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया. आजसू पार्टी के महासचिव उमाकांत रजक, अनुशासन समिति के अध्यक्ष सुबोध प्रसाद, राजेन्द्र मेहता, नईम अंसारी, हिमांशु पाठक समेत सभी मोर्चे और मंच के पदाधिकारी मौजूद थे.

इस अवसर पर बोलते हुए सुबोध प्रसाद ने कहा कि कर्पूरी जी अत्यंत पिछड़ी जाति से होते हुए भी समाज के सभी कमजोर वर्ग के लिए जीवन पर्यंत समर्पित रहे. उनके असामयिक निधन से सामाजिक न्याय के आन्दोलन को अपूर्णीय क्षति पहुंची. आज उनके विचारों की सबसे अधिक आवश्यकता है. इन्होंने कहा कि आजसू की सभी जिला इकाई कर्पूरी जयंती मना रही है.

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