चुप क्यों हो गए रामविलास पासवान जी !

लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भारत सरकार के मंत्री रामविलास पासवान लगता है ठंडे पड़ गए हैं. कुछ दिनों पहले तक रामविलास पासवान और उनके सुपुत्र चिराग पासवान ने बयानों की गर्माहट से पटना से दिल्ली तक की राजनीति को गर्म करने की कोशिश की थी. यह अलग बात है कि ना तब भाजपा ने उन बयानों पर कोई नोटिस लिया था, और ना अब ले रही है. भाजपा का संदेश साफ है, छोटे सहयोगी साथ रहना चाहे तो चुपचाप रहें या बाहर का रास्ता देख ले.

दरअसल जब चंद्रबाबू नायडू ने NDA से अलग होने का फैसला किया और केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस दी तो NDA में घुट रहे लोजपा और रालोसपा जैसे दल भी बयानों के तीर चलाने लगे. रामविलास पासवान के बयानों की समीक्षा करते हुए बिहार के एक भाजपा नेता कहते हैं कि अब जब चुनाव नजदीक है तो पासवान जी और कुशवाहा जी सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए इस तरह के बयान देने के लिए बाध्य हैं.

क्या सचमुच यही मामला है! क्या सीटों की बार्गेनिंग के लिए यह सब हो रहा है! क्या लोकसभा और विधानसभा चुनाव में लोजपा को यह सब करके कुछ सीटें ज्यादा मिल जाएंगे! यह सभी सवाल भविष्य के गर्भ में है. लेकिन भाजपा के संकेत को देख कर तो नहीं लगता कि इन पार्टियों को पिछली बार जितनी सीटें दी गई थी, उतनी भी दी जा सकेगी. ऐसे में पार्टी कैडर्स क्या करेंगे. जब नेता चुनाव ही नहीं लड़ेंगे तो फिर पार्टी में रहेंगे नहीं और इस तरह पार्टी खाली हो जाएगी. खाली होने का यही डर रामविलास पासवान जैसे नेताओं को डरा रहा है.

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