पद्मावती पर चुप क्यों हैं नीतीश कुमार ?

संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म पद्मावती का प्रदर्शन चार राज्यों में रोक दिया गया है, जिनमें तीन भाजपा शासित राज्य हैं और एक कांग्रेस शासित पंजाब. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या बिहार में पद्मावती रिलीज होगी या नीतीश कुमार इस पर रोक लगाएंगे. नीतीश कुमार की रहस्यमय चुप्पी इस मामले को और पेचीदा बना रही है.

उप मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी पहले ही पद्मावती फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ पर चिंता व्यक्त कर चुके हैं. भाजपा के कई केंद्रीय मंत्री, खुद बिहार के गिरिराज सिंह इस फिल्म की निंदा कर चुके हैं, ऐसे में यह सवाल सबकी जुबान पर है कि नीतीश कुमार का मौन कब टूटेगा!

इस विषय पर वरिष्ठ भाजपा नेता उपेंद्र चौहान कहते हैं कि नीतीश कुमार की चुप्पी से बिहार के क्षत्रिय समाज का धैर्य जवाब देने लगा है, वह कहते हैं एक तरफ भाजपा इस फिल्म के जरिए इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का विरोध कर चुकी है. कई राज्यों में फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने का फैसला हो चुका है. ऐसे में गठबंधन धर्म का भी तकाजा है कि बिहार में पद्मावती का प्रदर्शन रोका जाए और आहत क्षत्रिय समाज की भावनाओं को और चोटिल नहीं किया जाए.

ज्ञात हो कि बिहार में तकरीबन 5% राजपूत वोट बैंक है, यह वोट बैंक काफी आक्रामक होता है. राजपूत समाज NDA का समर्थक है. तो क्या नीतीश कुमार इस वोट बैंक को नाराज कर कोई सियासी खतरा मोल लेने को तैयार हैं, और क्यों! इस फिल्म के प्रदर्शन से कोई सियासी समर्थक वर्ग तो खुश भी नहीं हो रहा.

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