क्यों नहीं सुनी गई सांसद कड़िया मुंडा की बात!

पत्थलगड़ी समर्थकों ने मंगलवार को भाजपा सांसद करिया मुंडा के तीन हाउस गार्डों का अपहरण कर लिया है इतना ही नहीं सांसद कड़िया मुंडा की बहु को जबरन ले जा रहे थे लेकिन बाद में छोड़ दिया। हालांकि तीनों हाउस गार्डों को छुड़ाने के लिए पुलिस के लगभग 1000 जवान गांव के अंदर घुस गए हैं। इस दौरान पुलिस ने विरोध कर रहे ग्रामीणों के ऊपर लाठी चार्ज किया और आंसूगैस के गोले छोड़े। इन सब के बीच कड़िया मुंडा ने अपनी ही सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं उन्होंने कहा है कि पत्थलगड़ी मामले में सरकार लापरवाही बरत रही है। लोगों के जानमाल की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेवारी है। इन मामलों में सरकार का ढुलमुल रवैया समझ से परे है। उन्होंने कहा कि पत्थलगड़ी जब शुरू की गई थी उसी वक्त उन्होंने सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया था पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया।
पत्थलगड़ी पर सरकार के रुख से ये शुरू से ही कहा जाता रहा है कि सरकार जानबूझकर सामना करने से कतरा रही है, आश्चर्यजनक बात तो ये इसलिए भी है कि सरकार में बैठे लोग अपने ही वरिष्ठ नेता और पार्टी सांसद के बात की तवज्जो नहीं करते हैं। आज जिन तीन गार्डों को समर्थक उठाकर ले गए हैं अगर उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए जिम्मेवार कौन होगा। अगर पत्थलगड़ी समर्थक सांसद की बहू को उठाकर ले जाते तो सरकार क्या करती। सवाल ये भी है जब सांसद की बहू- बेटियां ही सुरक्षित नहीं हैं तो इस राज्य में आम व्यक्ति कैसे विश्वास करे की सरकार उसे सुरक्षा मुहैया कराएगी।

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