पासवान हाजीपुर में चुनाव प्रचार करने अबतक क्यों नहीं पहुंचे, पारस से अनबन की चर्चा !

लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण के लिए 6 मई को मतदान है। पांचवें चरण के चुनाव में बिहार में पांच सीटों पर मतदान होना है जिनमें सारण, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, मधुवनी और समस्तीपुर है। ये पांचों सीट पिछले लोकसभा चुनाव में NDA गठबंधन के पास थी। इस लोकसभा चुनाव में पांचों सीटों पर कांटे की टक्कर बनी हुई है।

पांच सीटों में हाजीपुर सीट सबसे हॉट सीट मानी जा रही है क्योंकि इस सीट से केंद्रिय मंत्री राविलास पासवान पिछले 35 साल से यहां सांसद रहे हैं। यहां देखना दिलचस्प यह है कि जनता किसे पंसद करती है रामविलास पासवान को या लोजपा को। इस बार राविलास पासवान ने अपने भाई और एलजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति नाथ पारस चुनाव मैदान में उतारा है। वही, दूसरी तरफ महागठबंधन की सीट से राजद ने शिवचंद्र राम पर अपना दाव खेला है। शिवचंद्र राम वर्तमान में राजा पाकड़ विधानसभा से विधायक हैं। 2015 से 2017 में यह बिहार सरकार में कला एवं संस्कृति मंत्री रह चुके हैं।

बताया जा रहा है कि केंद्रिय मंत्री रामविलास पासवान का संसदीय क्षेत्र हाजीपुर होने के बाबजूद पासवान अभी तक अपने भाई के लिए चुनाव प्रचार करने नहीं आए हैं। जबकि आज शाम 5 बजे के बाद चुनाव प्रचार खत्म भी हो जाएगा। जबकि रामविलास पासवान बिहार में होने वाली प्रधानमंत्री मोदी की चुनावी सभा में जाते हैं और सभा को संबोधित भी करते हैं। हांलाकि, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पारस के लिए चुनावी सभा कर चुके हैं। ऐसे में यह कयास लगाया जा रहा है कि क्या दोनों भाइयों में अनबन है क्या?

आपको बता दें कि रामविलास पासवान जेपी आंदोलन से राजनीति में आए। पासवान हाजीपुर लोकसभा सीट से 1977 में भारतीय लोक दल के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ा और कांग्रेस के बलेश्वर राम को हराकर संसद पहुंचे। पासवान 1980 में जेएनपीएस, 1989, 1996 और 1998 में जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते। 1999 में जदयू के टिकट पर वे 6वीं बार लोकसभा पहुंचे। इसके बाद रामविलास ने 2000 में लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना की। वे 2004 और 2014 में लोजपा के टिकट से सांसद बने। 1984 और 2009 में इस सीट पर पासवान की हार भी हुई। 2009 में चुनाव हारने के बाद राजद ने अपने कोटे से पासवान को राज्यसभा भेजा था।

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