वचन देकर क्यों भूल गए मुखिया जी !

याद करिये, अभी कुछ ही दिनों पहले शहर के चौक-चौराहों पर मुखिया जी की बड़ी तस्वीर के साथ होर्डिंग लगी थी, जिसमें लिखा था, "रघुकुल रीत सदा चली आई। प्राण जाय पर बचन न जाई"। इससे लगा था कि वो न्यायप्रिय हैं।

लेकिन मुखिया जी से विपक्ष जब सीएस राजबाला वर्मा, डीजीपी डीके पांडेय, और एडीजी अनुराग गुप्ता पर एक्शन लेने के लिए कह रहा है तो वह खामोश हो गए हैं। हालांकि पहली बार मुख्य सचिव को जवाब देने कहा गया और उन्होंने जवाब दिया भी। लेकिन लोग सवाल तो कर ही रहे हैं। वो पूछ रहे हैं कि आखिर इस बेबसी की वजह क्या है? इतने गंभीर आरोपों में घिरे इन अधिकारियों पर मौन धारण करने के पीछे आखिर क्या मजबूरी है...

मुखिया जी की रहस्यमयी चुप्पी पर अब तो उनके सहयोगी मंत्री सरयू राय ने भी सलाह दे दिया है, उन्होंने कहा है कि नीति कहती है कि गुरु की, मंत्री की और वैद्य की उचित सलाह का आदर होना चाहिए। वहीं पार्टी के अंदर से मिल रही जानकारियों की मानें तो ये मामला पार्टी की सेहत के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकता है, मंत्री का स्पष्ट कहना है कि अगर सरकार ने अधिकारियों के बढ़ते विवाद पर शीघ्र कोई ठोस फैसला नहीं लिया तो इसका सियासी नुकसान होना तय है।

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