तेज प्रताप को गुस्सा क्यों आता है !

राजद सुप्रीमो लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव कई बार बगावती तेवर अपना लेते हैं, इधर कुछ महीनों से उन्होंने कई बार ऐसे रूप दिखाए हैं जिससे यह लगने लगा है कि वो कभी भी पार्टी के खिलाफ कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि पार्टी की स्थापना दिवस पर दोनों भाई जिस प्रकार सामने आए उससे तो यही लगता है कि फिलहाल कोई तूफान नहीं आने वाला है लेकिन अंदरखाने यह चर्चा जरूर है कि जब कुछ नहीं था तो उन्होंने पार्टी छोड़ने की धमकी क्यों दी। अपने पिता लालू यादव की तरह ही बेबाक, बिना लाग-लपेट के बोलने वाले तेजप्रताप अपने कार्यकर्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय भी हैं। वे अपने लोगों से बेहद जिंदादिली से बात करते हैं या मिलते हैं। इसलिए उनकी बातों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है।

राजद सुप्रीमो लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव अपने बयानों से सुर्खियों में बने रहते हैं। लालू यादव जब से चारा घोटाले में सजा सुनाए जाने के बाद परिवार से दूर हैं, कई मामलों को लेकर तेजप्रताप खुलेआम बगावती सुर अख्तियार कर लेते हैं। बताया जाता है कि पार्टी में अपनी बातों को तवज्जो नहीं दिए जाने के कारण तेजप्रताप यादव खुद को ठगा हुआ या इसे अवहेलना के तौर पर देखते हैं जिसके कारण उनका गुस्सा फूट पड़ता है। अपने पिता लालू यादव की तरह ही बेबाक, बिना लाग-लपेट के बोलने वाले तेजप्रताप अपने कार्यकर्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय भी हैं। वे अपने लोगों से बेहद जिंदादिली से बात करते हैं या मिलते हैं। इधर कुछ दिनों से वे पार्टी के अंदर अपना सुझाव नहीं सुने जाने से इस कदर बिफरे हुए हैं कि पार्टी छोड़ने तक की धमकी दे चुके हैं।
अपने गुस्से या खीझ को उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए जाहिर किया, हालांकि उसे बाद में डिलीट कर दिया गया लेकिन इससे एक बात तो स्पष्ट है कि उनके अंदर कहीं न कहीं ये मलाल जरूर है कि उन्हें कोई खास तवज्जो नहीं मिल रहा है जबकि उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव के आगे-पीछे राजद का बड़ा से बड़ा नेता घूम रहा है।
जानकारों की मानें तो इसी दर्द को तेजप्रताप ने फेसबुक पोस्ट जरिए साझा किया और उन्होंने अपनी मां राबड़ी देवी और पापा लालू प्रसाद पर उन्हें अनसुना करने का आरोप लगाया। पोस्ट में उन्होंने राजनीति छोड़ने की घोषणा कर दी। कुछ घंटे बाद ही ये पोस्ट डिलीट कर दिया गया और उसकी जगह तेज प्रताप ने नया पोस्ट किया। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अकाउंट को किसी ने हैक कर उनके घर में महाभारत कराने का प्रयास किया है।
तेज प्रताप ने रिश्तेदार ओमप्रकाश यादव (भुट्टू) के बारे में फेसबुक पर लिखा, वे उनके क्षेत्र महुआ में पागल, सनकी और जोरू का गुलाम कह कर मेरी छवि को धूमिल कर रहे हैं। इसमें एमएलसी सुबोध राय भी हैं। जनता ने दोनों को आस्तीन का सांप बताया है, पर मम्मी मुझे ही डांटती हैं। मम्मी-पापा को कई बार बता चुका हूं। मैं बहुत प्रेशर में हूं। क्षेत्र की जनता से उन्होंने पूछा है कि इतनी प्रेशर में राजनीति हो सकती है क्या?
तेजप्रताप ने लिखा, इन कीड़े-मकोड़ों को चुटकी में मसल सकता हूं किन्तु मेरा पैर अपनों के कारण रुक जाता है। पार्टी व परिवार में मेरी यही स्थिति बनी रही तो अब मैं राजनीति नहीं करूंगा। महुआ की राजनीति वही लोग करेंगे जो मेरी छवि धूमिल कर रहे हैं। राजद से भुट्टू ही महुआ से चुनाव लड़ेगा।
बताया जा रहा है कि तेजप्रताप ने लोकसभा चुनाव को देखते हुए अपने विधानसभा क्षेत्र महुआ में टी-पार्टी के जरिये कार्यकर्ताओं की समस्या सुनकर उसे हल करने का अभियान शुरू किया है। वहां सभी कार्यकर्ता सिर्फ भुट्टू और सुबोध की शिकायत लेकर पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने कहा कि भुट्टू और सुबोध अफवाह फैला रहे हैं। दोनों लोगों से कहते हैं कि तेजप्रताप तो नाम के विधायक हैं। उन्हें कुछ भी नहीं आता है।
हालांकि लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप चंद घंटे में ही परिवार पर लगाए अपने आरोप से पलट गए और फेसबुक पर पोस्ट किया कि 'चाचा' ने बीजेपी के साथ मिलकर हमें परिवार से तोड़ने की कोशिश की है। उनके फेसबुक आईडी को हैक कर लिया गया। पहले भी हम दोनों भाई और अब

मेरी मम्मी के बारे में ग़लत लिखा गया है। हमारे बढ़ते प्रभाव से विरोधी बौखला कर निम्नस्तरीय राजनीति पर उतर आए हैं। आरएसएस और भाजपाई आईटी सेल द्वारा उनका अकाउंट हैक कर लालू-राबड़ी परिवार के बारे में दुष्प्रचार किया जा रहा है। पहले भी पिता लालू प्रसाद का फेसबुक पेज आरएसएस के एक समर्थक द्वारा हैक किया गया था।
भाजपा के लोग लगातार सोशल मीडिया के एकाउंट हैक करने में लगे रहते हैं। आज वे इसमें सफल हो गए।
लेकिन सियासी गलियारे में यह चर्चा भी बहुत ही तेजी से हो रही है कि शांत रहने वाले तेजप्रताप ने अपनी बात रख दी है और अपने मन की बात को सबके सामने रख कर एक तरह से उन्होंने अपनी पार्टी और परिवार को भी जता दिया है कि आनेवाले समय में उनकी अनदेखी की गई तो वे कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं।
बता दें कि अभी हाल में ही उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपनी अनदेखी का इजहार कर दिया था और कहा था ऐसी हरकत वह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने एकदम से पार्टी में खलबली मचा दी थी। बहरहाल इसको लेकर कई तरह की बहस होने लगी थी।
तेज प्रताप यादव ने ट्वीट कर लिखा था 'मेरा सोचना है कि मैं अर्जुन को हस्तिनापुर की गद्दी पर बैठाऊं और खुद द्वारका चला जाऊं। अब कुछेक 'चुग्लों' को कष्ट है कि कहीं मैं किंग मेकर न कहलाऊं। ।। राधे राधे।।'
सोशल मीडिया पर तेज प्रताप के दिए गए बयान से सियासी हलकों में कई तरह के कयास लगाए जाने लगे कहा जाने लगा कि मगध की जगह पर हस्तिनापुर लिखकर तेजप्रताप ने दिल्ली की गद्दी की ओर इशारा किया है। वहीं कुछ लोगों का कहना था कि ऐसा लिखकर तेजप्रताप ने एक प्रकार से अपने छोटे भाई को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया।
लेकिन इन सब बीच तेज प्रताप पार्टी में अपनी अनदेखी को लेकर नाराजगी जताई थी और उन्होंने अपनी पत्नी, बहन मीसा भारती, और भाई का भी जिक्र किया था। उन्होंने पार्टी को बचाने की बात तो की थी लेकिन इसके लिए अनुशासन की भी बात की। तेज प्रताप यादव ने कहा था कि पार्टी में मुझे अपमानित किया जा रहा है। राजद में कुछ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा हो गया है। उसे ठीक करने की जरूरत है। कुछ लोग हैं जो भाइयों में फूट डालकर परिवार की प्रतिष्ठा को खत्म करना चाहते हैं। वैसे नेता मेरी बात भी नहीं सुनते और पार्टी को बांटना चाहते हैं। उन्हें बर्खास्त करने की जरूरत है।
हालांकि राजद प्रवक्ता मनोज झा ने राजद के अंदर किसी घमासान से इनकार किया था। उन्होंने तेजप्रताप को बेहद सरल इंसान बताते हुए कहा कि वह पार्टी की चुनौतियों का जिक्र कर रहे। पार्टी में अनुशासन की बात कर रहे हैं। किसी कलह की बात नहीं कर रहे।
वहीं भाइयों के बीच उभरे विवाद पर तेजस्वी यादव ने कहा था कि राजद परिवार में कहीं कोई झगड़ा नहीं है। सभी लोगों का सम्मान है। तेज प्रताप यादव ने राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे पर आरोप लगाया था कि प्रदेश अध्यक्ष उनकी बात नहीं सुनते और ना ही उनकी कोई सलाह मानते हैं। इस मामले में तेजस्वी यादव ने कहा था कि रामचंद्र पूर्वे उनके अभिभावक हैं। तेजस्वी ने अपने बड़े भाई के बयान को किसी तरह का विवाद मानने से ही इनकार कर दिया था। तेजस्वी ने कहा था कि पार्टी हर दिन मजबूत हो रही है और हर आदमी को तरजीह भी दी जा रही है। तेज प्रताप ने जिस व्यक्ति को पद देने को कहा था, उसका मनोनयन पहले किया जा चुका है।
बाद में तेजप्रताप ने ही इस मुद्दे पर विराम लगा दिया और कहा कि दोनों भाई में कोई अनबन नहीं है। पार्टी में जिन्होंने फूट डालने का काम किया, उन्हें हमलोगों ने दूर कर दिया। ये सब सिर्फ अफवाह है। मेरे छोटे भाई अर्जुन की भूमिका में और मैं कृष्ण की भूमिका में हूं। तेजस्वी यादव ने भी कहा कि जो लोग विवाद पैदा कर रहे हैं, उन लोगों को हम दोनों भाइयों की आपसी केमिस्ट्री अच्छी नहीं लगती।

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