अर्जुन मुंडा के बाद सरयू राय भी दरकिनार!

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 17 सितंबर को रांची से विदा हो गए। जाते-जाते उन्होंने नेताओं, कार्यकर्ताओं को ताकिद की है कि मिलजुलकर काम करें। किसी भी हाल में मिशन 2019 में भाजपा की सरकार बनानी है। लेकिन उनको विदा करने से पहले ही पार्टी के भीतर की आंतरिक कलह बाहर आ गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एक- दूसरे को नीचा दिखाने पर तुले हैं। ताजा प्रकरण राज्य के सबसे ज्यादा चर्चित खादी बोर्ड से जुड़ा है।

मामला कुछ ऐसा है कि 17 से 24 सितंबर तक झारखण्ड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड जमशेदपुर में राष्ट्रीय खादी एवं ग्रामोद्योग मेला का आयोजन कर रहा है। इसके लिए 17 सितंबर को सभी अखबारों में एक विज्ञापन दिया गया है। अब इसे सोची-समझी साजिश कहें या चूक पर इस विज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, मुख्यमंत्री रघुवर दास, जिले के सभी विधायक, सांसद सबों का नाम दिया गया है पर मंत्री और स्थानीय विधायकसरयू राय जिनके क्षेत्र में कार्यक्रम हो रहा उनका नाम विज्ञापन और आमंत्रण कार्ड से गायब है। हालांकि इस कार्यक्रम में आने का निमंत्रण पत्र उन्हें जरूर भेजा गया है। ध्यान रहे कि झारखण्ड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय सेठ हैं।

बहरहाल, इस मामले पर सोशल मीडिया पर खूब कमेंट आ रहे हैं। पर मंत्री सरयू ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर कहीं कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि परदे के पीछे कुछ खिचड़ी जरूर पक रही है। पहले अर्जुन मुंडा फिर सरयू राय को सरेआम छेड़ने का मकसद का कोई तो मतलब जरूर होगा। जो लोग खादी बोर्ड के अध्यक्ष की मुख्यमंत्री से राजनीतिक करीबी को अच्छी तरह जानते हैं। इसके पीछे की पृष्ठभूमि को ठीक-ठीक समझते हैं।

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