आखिर कौन कर रहा अंजलि यादव का विरोध और क्यों!

अब इसे इत्तेफाक कहिए या कुछ और...लेकिन ये सच है कि महज कुछ महीने पहले जिस पद पर आईएएस अधिकारी भोर सिंह यादव तैनात थे, उसकी कमान आज उनकी धर्मपत्नी अंजलि यादव के हाथों में है। जब भोर सिंह यादव रांची के एसडीओ थे तो उन्होंने अवैध कारोबारियों की नींद उड़ा दी थी, अब अंजलि आई हैं तो इन्होंने आते ही दंगाइयों की खूब खबर ली है।

बहरहाल, इन सब के बीच जिस प्रकार भोर सिंह यादव ने चंद दिनों में ही अपने तेवर से सबको बता दिया था कि वे रसूखदारों के आगे किसी कीमत पर नहीं झूकेंगे, उनकी पोल खोल कर रहेंगे। और उन्होंने वैसा ही किया भी, यही कारण था कि उनके खिलाफ विरोध करने वालों की बड़ी फौज भी खड़ी हो गई। वहीं इन सभी कार्रवाईयों के बाद रांची के प्रशासनिक और सियासी हलकों में भोर सिंह यादव की जमकर आलोचना की गयी थी। यहां तक कि झारखंड चैंबर के अध्‍यक्ष ने कहा था कि उन्‍हें भोर सिंह के काम से नहीं, उनके काम करने के तरीकों से परेशानी है।

कहा जा सकता है कि उनकी बैखौफ कार्रवाईयों से कुछ लोगों में तो इतना भय व्याप्त हो गया कि अंततः आनन-फानन में सरकार को उनका तबादला करना पड़ा। अब उनकी पत्नी अंजलि यादव ने भी वही सख्त तेवर दिखाए हैं, उन्होंने भारत बंद के दौरान उपद्रव फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। आदिवासी हॉस्टल से छात्रों को बाहर निकाला, उनको गिरफ्तार किया गया। अंजलि इस दौरान पूरे एक्शन में दिखीं। इससे पहले भी वो गलत करने वालों पर कानून का डंडा चलाती दिखी थी.

उधर, पुलिस और प्रशासन की इस कार्रवाई पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की है। इसके साथ ही प्रशासन द्वारा छात्रों के साथ की गयी सख्ती को लेकर हमला कर रही है। इसे देखते हुए एक बार फिर सियायी गलियारों में ये बात कही जाने लगी है कि क्या अब अंजलि यादव भी, भोर सिंह यादव की तरह ही किनारा कर दी जाएंगी। हालांकि मुख्यमंत्री रघुवर दास ने जिस प्रकार बयान दिया है कि हिंसा फैलाने वालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, इससे तो ऐसा कुछ होगा ये अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

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