2018 में किस ओर मुड़ेगी तेज़स्वी की राजनीति !

2018 की शुरुआत हो चुकी है और राजद अध्यक्ष की अनुपस्थिति में तेजस्वी यादव राजद का मोर्चा संभाले हुए हैं, सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखकर भावी संघर्ष की रूप रेखा तय कर रहे हैं. लेकिन तेज़स्वी यादव को भी एनडीए के द्वारा क़ानूनी तरीके से घेरा जा रहा है. ऐसे में लाख टके का सवाल यह है कि आखिर कैसे सब कुछ मैनेज कर पाएंगे तेज़स्वी यादव! नए वर्ष में क्या होगी तेज़स्वी यादव की राजनीति!

बिहार की राजनीति के जानकार बताते हैं कि तेज़स्वी यादव के नेतृत्व को लेकर राजद कैडर में अब कोई भ्रम नहीं है. लगभग नेताओं ने तेज़स्वी और तेजप्रताप यादव को राजद का लीडर स्वीकार कर लिया है. लालू प्रसाद ने जेल जाने से पहले पार्टी में सेकेंड लाइन लीडरशिप इस्टेब्लिश कर दिया. लालू प्रसाद को पता था कि रांची कोर्ट उनको सजा सुना सकती है और जेल जाने की स्थिति में पार्टी कैडर में कोई असमंजस ना पनपे इसलिए वह आनेवाले दिनों की पूरी राजनीतिक पटकथा तैयार कर गए थे और तेज़स्वी को आनेवाले दिनों का सारा संघर्ष सूत्र दे गए.

तेजस्वी यादव ने लालू प्रसाद के फार्मूले का इस्तेमाल करते हुए सारे वरिष्ठ नेताओं की कोर कमेटी बनाकर आने वाले दिनों के संघर्ष का एजेंडा तैयार कर लिया है. इस कोर कमेटी के जरिये तेज़स्वी ने यह बताने की कोशिश की है कि पार्टी समेकित दृष्टिकोण से चलेगी. इसके अलावा तेज़स्वी ने युवाओं की एक समानांतर कमेटी बनाई है. युवाओं की टीम लगातार बिहार के हर जिले से एक्टिविटी फीड बैक राजद प्रदेश कार्यालय को भेज रही है. राजद के राजनीतिक अजेंडे का फीड बैक भी तेज़स्वी को रोज़ भेजा जाता है. तेजप्रताप यादव भी लगातार स्टूडेंट्स और यूथ ब्रिगेड को लालू स्टाइल में मोटीवेट करते हैं. ऐसी स्थिति में तेज़स्वी खुद सर्वमान्य नेता के तौर पर उभर रहे हैं.

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *