तो क्या कानूनची पार्टी है भाजपा!

झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने पार्टी से बीजेपी में शामिल हुए 6 विधायकों के खिलाफ जैसे ही एक पत्र जारी किया। बीजेपी में भूचाल आ गया। बाबूलाल के इस लेटर बम से घबराकर दूसरे ही दिन बीजेपी के सारे बड़े नेताओं ने मीडिया के सामने हाजिरी लगाई और कहा कि बाबूलाल का पत्र फर्जी है, वे निराधार और बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। डॉ रविंद्र राय ने तो सीधा कहा कि झारखंड की धरती का दूसरा केजरीवाल हैं बाबूलाल। उन्होंने कहा कि विधायकों की खरीद-फ़रोख़्त के आरोप को बाबूलाल मरांडी 7 दिनों के अंदर साबित करें या सार्वजनिक माफी मांगे, वरना प्रदेश बीजेपी उन पर मानहानि का मुकदमा करेगी।

इन सब के बीच झाविमो छोड़कर बीजेपी में आए विधायक नवीन जायसवाल और विधायक आलोक चौरसिया ने झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। राजनीतिक गलियारे में इस मामले को लेकर खूब चर्चा हो रही है कि बीजेपी इस राजनीतिक लड़ाई को मुकदमेबाजी से क्यों लड़ना चाहती है, क्योंकि सभी लोग यह जानते हैं कि मानहानि के मुकदमे से बीजेपी को कुछ भी हासिल होनेवाला नहीं है, वहीं बाबूलाल तो अपने मकसद में कामयाब हो गए, अब जितने दिनों तक इस मामले को लेकर बीजेपी बाबूलाल पर हमला करेगी विधायकों के दलबदल का मुद्दा उतना ही गरमाएगा और शायद यही बाबूलाल भी चाहते हैं। इस पूरे मामले में बीजेपी की हालत खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली है।

बता दें कि झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि बीजेपी ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उनकी पार्टी के छह विधायकों को 11 करोड़ रुपये देकर खरीदा था।

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