क्या खत्म हो जाएगा येदियुरप्पा का सियासी सफर!

कर्नाटक चुनाव में सूबे को दो दिग्गजों को सियासी भविष्य अब किस तरफ जाएगा इसको लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। दोनों ही नेता अपनी- अपनी पार्टियों के ताकतवर नेता रहे हैं। ये हैं कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा। जहां एक ओर सिद्धारमैया ने चुनाव परिणाम आने से पहले ही अपनी मंशा साफ कर दी थी कि अब वे राजनीति से दूर जा सकते हैं।

उन्होंने स्पष्ट कह भी दिया था कि हाईकमान चाहे तो किसी दूसरे चेहरे को राज्य की कमान सौंप सकती है। वहीं बीजेपी नेता येदियुरप्पा ने सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद राजनीति में बने रहने की बात तो कही है लेकिन हाईकमान उन्हें आगे भी राज्य का नेतृत्व सौंपेगी इसको लेकर कई तरह की बातें सियासी हलकों में सुनी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो येदियुरप्पा का राजनीतिक भविष्य अब इस बात पर निर्भर करता है कि आगामी लोकसभा चुनाव में वे अपने राजनीतिक कौशल से बीजेपी को कितना सीट दिला पाते हैं। हालांकि सदन में दिए गए अपने भाषण में उन्होंने हाईकमान को कहा है कि वे पीएम मोदी को लोकसभा में सबसे अधिक सीटें जीत कर विधानसभा में मिली शिकस्त की मलाल को दूर करेंगे।
बहरहाल, पार्टी के अंदर से जो बातें सामने आ रही हैं उसके मुताबिक आगामी लोकसभा चुनाव तक लिंगायत मतों के ध्रुवीकरण की खातिर उन्हें पद पर बनाये रखा जा सकता है।
वैसे भी कहा जा रहा है कि अगले विधानसभा चुनाव में येदियुरप्पा के बीजेपी का चेहरा बनने की संभवना न के बराबर है क्योंकि तब तक वे बहुत बूढ़े हो चुके होंगे। अभी वह 75 साल अधिक उम्र के हैं। वहीं ये भी कहा जा रहा है कि पार्टी प्रदेश में येदियुरप्पा के बाद दूसरी पीढ़ी के नेताओं को आगे लाने की तैयारी में है। यही कारण है कि पार्टी ने इस बार चुनाव में बी श्रीरामलू और अनंत कुमार हेगड़े जैसे युवा नेताओं को भी काफी महत्व दिया।

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