किस डर से ममता ने दिया ‘भाजपा भारत छोड़ो’ का नारा?

ममता बनर्जी भाजपा से इतनी खफा हैं कि अब वो भाजपा भारत छोड़ो का नारा लगा रही हैं। ममता ने केंद्र सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने, धर्मनिरपेक्षता पर खतरे और देश बांटने वाली राजनीति का आरोप लगाया है। दरअसल लोकतांत्रिक राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तो मान्य हैं, लेकिन भाजपा के प्रति आखिर ममता बनर्जी इतना ‘बैर’ क्यों रखती हैं?

खुद ममता बनर्जी पर कई घोटालों के दाग हैं। नारदा, शारदा और रोजवैली स्कैम में उनपर आम लोगों के सैकड़ों करोड़ रुपये इधर से उधर करने के आरोप हैं। इन सभी मामलों की जांच चल रही है। ये जांच अदालतों की अगुवाई में केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं। ममता सरकार के कई पूर्व मंत्री और टीएमसी नेता इन्हीं मामलों में सलाखों के पीछे जा चुके हैं। बस यही ममता की कमजोर कड़ी हैं और वो जानती हैं कि देर सबेर जांच की आंच उनतक भी पहुंचेगी और वो अगर जेल गयीं तो उनकी सियासत ही बिखर जाएगी।

क्या इसी डर से ममता ने आरोप लगाया है कि, ‘‘वह हमें प्रवर्तन निदेशालय, आयकर और सीबीआई से डराने की कोशिश कर सकते हैं लेकिन हम इससे नहीं डरते हैं। केंद्र सरकार एजेंसियों की, एजेंसियों द्वारा और एजेंसियों के लिए सरकार में तब्दील हो गई है।’’ तृणमूल ने भाजपा पर आदिवासियों और समाज के पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए ‘घड़ियाली आंसू’ बहाने का आरोप भी लगाया है।

ममता ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस सभी विपक्षी दलों के साथ मिलकर भाजपा को साल 2019 के लोक सभा चुनाव में बाहर का रास्ता दिखाने के लिए काम करेगी। हम सभी विपक्षी पार्टियों के साथ काम करेंगे ताकि हम भाजपा के विरूद्ध एक होकर लड़ सकें। हम सांप्रदायिकता और घृणा की राजनीति का अंत करना चाहते हैं। ‘‘हम लोग लड़ेंगे और तब तक नहीं रूकेंगे जब तक कि भाजपा को सत्ता से बाहर न कर दें।’’

पिछले तमाम चुनावों का ग्राफ देखें तो लगता है कि राज्य में बीजेपी का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता जा रहा है। राज्य की जनता ने ममता को जिन वामपंथियों और कांग्रेसियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाला समझा था, वो अब उन्हीं की दोस्त बन गई हैं। जनता की नजरों में चोर-चोर मौसेरे भाई वाली स्थिति बन गई है। इसका परिणाम हुआ है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी ही एकमात्र विपक्ष की तरह दिख रही है। टीएमसी – कांग्रेस - लेफ्ट का अघोषित गठबंधन है, ये बात वहां की जनता भलि- भांति समझ चुकी है। भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण के कारण उनकी राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है इसीलिए वो भाजपा को ही अपना मुख्य विरोधी मानने लगी हैं।

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