आनंद मोहन की राजनीति का क्या हुआ!

कृष्णैया हत्याकांड में सजा काट रहे आनंद मोहन की सियासत क्या उनके चेलों ने हड़प ली! जिस तरह आनंद मोहन या उनकी पत्नी लवली आनंद की और से खामोशी की चादर ओढ़ ली गयी है, वो तो यही इशारे कर रही है कि इनके चेलों ने इस राजपूत सम्राट की सियासी विरासत पर पूरी तरह कब्ज़ा कर लिया है.

एक समय था, आनंद मोहन और उनकी युवा ब्रिगेड बिहार में आग उगलती थी. तब पप्पू यादव और इनकी सियासी अदावत से कोसी और सीमांचल का पूरा इलाका थर्राता था. दोनों बाहुबली थे. अपनी-अपनी जातियों का समर्थन था इन्हें. मीडिया के इनके चमचे इनकी बन्दूक वाली तस्वीर छापते थे ताकि खौफ की फसल ये काटते रहें.

परिस्थितियां बदली, पप्पू यादव तो अजित सरकार मर्डर केस में बरी हो गए लेकिन गोपालगंज के हरदिल अजीज जिलाधिकारी कृष्णैया हत्याकांड में आनंद मोहन ऐसे फंसे कि जेल में कविता लिखने के अलावा इनके पास कोई काम नहीं बचा. इनकी बिहार पीपुल्स पार्टी का वजूद तक नहीं बचा. चेलों ने मुंह मोड़ लिया. कोसी और सीमांचल इलाके में नार्थ लिबरेशन आर्मी ने इनकी मिटटी पलीद की. सांसद पत्नी लवली आनंद देहरादून में स्कूल चलाने में व्यस्त हो गयी. इनके कई लठैत विधायक हो गए तो कई ठेकेदार. इसलिए कहा गया है कि सियासत हो या धर्म, जैसा बोयेंगे वैसा ही तो काटेंगे.

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