मुझे वोट की चिंता नहीं : नीतीश

बिहार में जोकीहाट उपचुनाव में मिली हार की कसक जदयू अभी तक भूला नहीं पाया है। जिस प्रकार पार्टी की हार हुई है उससे अंदर ही अंदर नीतीश कुमार के कद को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को खूब उछाला और उपचुनाव को नीतीश और तेजस्वी की साख से जोड़कर देखा जाने लगा। उपचुनाव में हार के बाद विपक्ष ने कहा कि बिहार की जनता ने नीतीश कुमार को खारिज कर दिया है। इन सब के बीच नीतीश कुमार पहली बार जब जदयू के युवा सम्मेलन में अपने कार्यकर्ताओं के बीच आए तो वे खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने जोकीहाट उपचुनाव में हार के दर्द को सबके बीच साझा किया और कहा कि जोकीहाट में मैं वोट मांगने नहीं गया था। लोगों से काम के आधार पर वोट करने की बात जरूर कही थी।

इसके साथ ही नीतीश ने कहा, मुझे वोट की चिंता नहीं है और ना ही जातीय समीकरण पर मेरा यकीन है। नीतीश ने सम्मेलन में कहा कि मेरे 12 साल के कार्यकाल को उठाकर किए गए कार्यों के इतिहास को देख सकते हैं।

नीतीश कुमार ने अल्पसंख्यकों के लिए किए गए कार्यों का बखान करते हुए कहा कि बिहार में पहले अल्पसंख्यकों के लिए मात्र 3 करोड़ का बजट हुआ करता था लेकिन हमने उसे बढ़ाकर 800 करोड़ कर दिया। पहले मदरसों की क्या स्थिति थी यहां सब जानते हैं और आज क्या है देख लें। अल्पसंख्यकों के रोजगार के लिए भी सरकार ने खूब काम किए हैं। हर वर्ग और हर क्षेत्र के विकास के लिए काम किया जा रहा है।

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