समाजवाद की चौखट पार कर भाजपा के आँगन में उपेन्द्र चौहान

उपेन्द्र चौहान अब बिहार भाजपा के तेज़ तर्रार युवा राजपूत चेहरा हैं। 84 से समाजवादी राजनीति के मजबूत हस्ताक्षर रहे उपेन्द्र ने बिहार की सत्ता और सियासत को करीब से देखा है, पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के जनमोर्चा से जनता दल, फिर राष्ट्रीय जनता दल और नीतीश कुमार के जनता दल यू तक हर संगठन को उन्होंने अपने खून पसीने से सींचा। किसी से कुछ लिया नहीं, बस देते रहे मुक्तकंठ से।

लोहिया की विचारधारा से प्रभावित उपेन्द्र चौहान अपनी पूरी सियासी यात्रा में लोहिया का राष्ट्रवाद ढूंढते रहे। पर अफ़सोस लोहिया के चेलों ने उनके राष्ट्रवादी विचार को किसी डब्बे में बंद कर दिया। ऐसे में आरएसएस की विचारधारा और नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रवादी विचार ने उपेन्द्र चौहान को भाजपा के आँगन में ला खड़ा किया। उपेन्द्र कहते हैं कि लोहिया को उनके नकली चेले पूरी तरह भूल चुके हैं, ऐसे में कई बार भाजपा में जाने की परिस्थिति बनी लेकिन कुछ- कुछ कारणों की वज़ह से उनका केसरिया बाना धारण करना टलता रहा। लेकिन नरेंद्र मोदी के विचारों और आरएसएस के अपने कई मित्रों और अभिभावकों के कहने पर उपेन्द्र भाजपा परिवार के हो गए।

उपेन्द्र के भाजपा में आते ही सारण लोकसभा क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गयी। केन्द्रीय मंत्रिमंडल से जबसे राजीव प्रताप रूडी को नरेंद्र मोदी ने बाहर का रास्ता दिखाया है, तब से माना जा रहा है कि उपेन्द्र चौहान पूर्व मंत्री राजीव प्राताप रूडी की काट हो सकते हैं। वह बिहार के जनाधार वाले राजपूत नेता के तौर पर पहले से स्थापित हैं।
बिहार के हर हिस्से में उनके समर्थक हैं, ऐसे में भारतीय जनता पार्टी चौहान को संगठन में उचित स्थान देकर उनका इस्तेमाल अवश्य करना चाहेगी।

इस सम्बन्ध में उपेन्द्र चौहान कहते हैं कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री के सक्रिय समर्थन की वज़ह से मैं पार्टी में हूं, आगे जो भी पार्टी का आदेश होगा, उसे एक अनुशासित सिपाही के रूप में निभाने की कोशिश करूँगा।

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