वामपंथ के गढ़ में शाह के बाद योगी की पदयात्रा

वामपंथ के सबसे मजबूत किले केरल को भेदने के लिए वहां की बीजेपी इकाई और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की पहली पसंद यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ हैं। मंगलवार को 'लाल आतंक' के विरोध का नाम देते हुए अमित शाह ने जिस 'जनरक्षा यात्रा' का आगाज किया है, बुधवार को उसकी बागडोर योगी के हाथों में होगी। इस पहल से यह साफ है कि आक्रामक मुद्दों पर योगी की लोकप्रियता को पार्टी दूसरे राज्यों में भी भुनाने को तैयार है।

वैचारिक लड़ाई में बीजेपी अपना सबसे बड़ा दुश्मन वामपंथियों को मानती है। वामपंथ के सबसे मजबूत किले के तौर पर अभी केरल बचा है, हालांकि बीजेपी ने यहां अपनी पैठ और गहरी की है। वहां कार्यकर्ताओं की लगातार हो रही हत्याओं को पार्टी और संघ ने पिछले एक साल से आक्रामक तौर पर 'लाल आतंक' के रूप में पूरे देश में पेश करना शुरू किया है। इसी कड़ी में अमित शाह ने जनसुरक्षा यात्रा का भी आगाज किया है।

बुधवार को यात्रा के दूसरे दिन इसकी बागडोर योगी संभालेंगे। यात्रा के दौरान योगी ने कहा कि यह केरल, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा की कम्यूनिस्ट सरकार को आईना दिखाने के लिए है और ऐसी राजनीतिक हत्याएं रुकनी चाहिए। योगी ने आगे कहा लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है फिर भी राजनीति से प्रेरित हत्याएं हो रही हैं। योगी कन्नूर जिले के कचहरी से कन्नूर तक 9 किमी तक पदयात्रा करेंगे। इस पदयात्रा की सबसे खास बात यह है कि योगी जिन जगहों पर जाएंगे, वह केरल के मौजूदा मुख्यमंत्री पी विजयन और सीपीआई के राज्य सचिव के. बालाकृष्णन का गृह जिला भी है।

बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि यात्रा के लिए योगी आदित्यनाथ संगठन के कार्यकर्ताओं की पहली पसंद थे। इसके पीछे सबसे अहम वजह यह है कि जिन मुद्दों पर पार्टी के लोग केरल में लड़ रहे हैं, योगी आदित्यनाथ पहले से इन मुद्दों पर काम कर रहे हैं। दूसरे हिंदुत्व के चेहरे के तौर पर उनकी यहां बीजेपी समर्थकों और कार्यकर्ताओं में काफी लोकप्रियता है। इसलिए उनका आना पार्टी के लिए फायदेमंद साबित होगा।

जहां तक योगी आदित्यनाथ की बात है, उनकी छवि एक कट्टर भगवा नेता की है। उनमें भीड़ को खींचने की ताकत है। हालांकि, योगी को केरल बुलाने की बस यही वजह नहीं है। दरअसल, अभी तक पार्टी के बड़े नेता सिर्फ अपने इलाकों में सीमित रहे हैं। पार्टी का मानना है कि योगी की ऐसी हिंदुत्ववादी अपील है, जो यूपी के बाहर भी पार्टी के काम आ सकती है।
इसके अलावा, आगे महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस और गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, बीजेपी के लिए योगी आदित्यनाथ केवल केरल में ही मुद्दों और अभियानों को गति नहीं देंगे बल्कि पार्टी ने दूसरे चुनावी राज्यों में उनको 'स्टार प्रचारक' के तौर पर चुनाव में उतारने का फैसला किया है। विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़े गुजरात में भी 13-14 अक्टूबर को योगी गुजरात गौरव यात्रा में शामिल होकर रोड शो करेंगे। पार्टी यहां विपक्ष की उभर रही संभावनाओं को खत्म करने में लगी है और उसे इसमें योगी के प्रभाव से भी आस है।

योगी की केरल यात्रा की अहमियत इससे समझी जा सकती है कि उनके पहुंचने के पहले ही वापमंथी दलों ने हमले शुरू कर दिए हैं। सीपीआई (एम) ने ट्वीट किया है 'हम यूपी के सीएम को प्रभावी ढंग से अस्पतालों का संचालन सीखने के लिए केरल के अस्पतालों का दौरा करने के लिए आमंत्रित करते हैं। ' ट्विटर पर योगी के पुराने भाषणों बनाम विजयन की उपलब्धियों से जुड़े पोस्ट वामपंथी नेताओं के हैंडल पर दिखने लगे हैं। वही यूपी बीजेपी के प्रवक्ता डॉ चंद्रमोहन का कहना है कि पार्टी के कार्यकर्ता के तौर पर योगी आदित्यनाथ भी वहां संगठनात्मक अभियान में हिस्सा लेने जा रहे हैं। वामपंथी दलों की प्रतिक्रिया उनकी हताशा को दर्शा रही है।

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