टूटा अर्जुन का मौन, निशाना कौन

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने बहुत दिनों बाद राजनीतिक मौन तोड़ा और कई विषयों पर सार्वजनिक तौर पर अपनी अलग सियासी लाइन ली . इसे लेकर भाजपा के अंदर तरह-तरह की बातें हो रही हैं .
अर्जुन मुंडा के समर्थक उनके सामने आने से खुश हैं तो उनके विरोधी ऑफ द रिकॉर्ड उनकी बातों को रिजेक्ट करते हैं.अर्जुन मुंडा ने सीधे-सीधे यह कह दिया कि झारखंड के आदिवासियों को विश्वास में लेने की जरूरत है. उन पर प्रशासनिक फैसले थोपे जा रहे हैं. स्वशासन की उनकी परंपरागत व्यवस्था को सरपास किया जा रहा है, जो ठीक नहीं है.उपचुनाव में हार के बाद अर्जुन मुंडा का मुखर होना और इसी वक्त भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल का सामने आना अपने आप में बहुत कुछ कहता है. पार्टी के बड़े नेता एक के बाद एक सामने आ रहे हैं और प्रकारांतर से पार्टी नेतृत्व के सामने असहज करने वाले प्रश्न रख रहे हैं .
अर्जुन मुंडा के सवाल बेहद प्रासंगिक हैं. विधानसभा अध्यक्ष के बाद वह दूसरे बड़े नेता हैं जिन्होंने स्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखी है. पार्टी नेतृत्व अगर समय रहते इन चिंताओं का समाधान नहीं करेगा, तो उसका सियासी खामियाजा भाजपा को आने वाले दिनों में चुकाना पड़ सकता है.

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