इमारत-ए-शरिया ने तीन तलाक के मुद्दे को सियासी बताया

-मोदी जी भाजपा और आर एस एस की राजनीति कर रहे : कासमी

तीन तलाक पर मचे हाय तौबा के बीच ताकतवर मुस्लिम संगठन इमारत–ए–शरिया के बिहार, झारखण्ड और ओडिशा के जेनरल सेक्रेटरी मौलाना अनिसुर रहमान कासमी ने इसे सियासी मुद्दा बताया है। कासमी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एग्जीक्यूटिव मेम्बर भी हैं। उन्होंने तीन तलाक के मुद्दे सहित अन्य कई ज्वलंत समस्याओं पर राजनीति गुरु संवाददाता कौशलेंद्र से बात की। पेश है खास अंशः

तीन तलाक पूरे देश में बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। इस पर आपका क्या कहना है?
पहली बात तो ये है कि देश में और बिहार में ये मुद्दा जानबूझकर बनाया गया है। मेरे ख्याल से ये कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। तलाक समाज का एक बहुत ही छोटा सा हिस्सा है और मेरी समझ से ऐसे लोग जिनका आपस में निर्वाह नहीं हो रहा हो वैसे लोग तलाक के जरिए, आपसी पंचायत के जरिए मामला सुलझाते हैं। आज ही मैं भारत सरकार के क्राइम ब्यूरो का रिपोर्ट देख रहा था, जिसके अनुसार पिछले पांच सालों में 49 हजार शादी-शुदा औरतों का कत्ल किया गया। लेकिन इसके साथ ही आप ये भी जानते हैं कि पिछले पांच साल में एक भी कातिल शौहर को फांसी नहीं दी गई। आप देखिए एक ओर देश की ऐसी हालत है कि समाज में तलाक को और मुश्किल बनाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर हिंदू समाज के लोग अपनी बीवियों से छुटकारा पाने के लिए उनका मर्डर कर देते हैं। जिसका नाम दहेज हत्या दिया जाता है। ये हत्याएं तिलक और दहेज के नाम पर हो रही हैं। यही हाल आज हम पूरे देश में देख रहे हैं। बहुत सारे लोग तलाक से बचने के लिए अपनी बीवियों को छोड़ देते हैं। देश में 22 लाख से ज्यादा ऐसी महिलाएं हैं जिनको उनके शौहर ने छोड़ दिया है। न वो तलाक देते हैं और न तो वे उन्हें बीवी बनाकर रखते हैं। देखा जाय तो इन बीवियों के साथ अन्याय, जुर्म बहुत है। लेकिन आज सिर्फ तीन तलाक को मुद्दा बना दिया गया है मेरी समझ में यह एक राजनीतिक मुद्दा है। जिसका मकसद सिर्फ वोट की सियासत है।

आप इमारत-ए-शरिया के बिहार, झारखंड, उड़िशा के सचिव हैं, अभी पक्ष और विपक्ष द्वारा की इसको लेकर जो नीति है उस पर क्या कहेंगे?
देखिए, दोनों पार्टियां सियासत कर रही हैं। पहली बात तो यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने दबाव में आ कर फैसला दिया हो या जैसे भी दिया हो, हम ये तो नहीं कह सकते। लेकिन जो फैसला सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर दिया था उसमें माना था कि तीन तलाक वाकई नहीं होता। तो फिर उस पर कानून बनाने की जरुरत ही नहीं थी। देखा जाय तो जब तलाक ही नहीं होती तो कानून बनाने की जरूरत ही क्या थी? इतना ही नहीं उन्होंने इस कानून को सिविल से उठाकर फौजदारी में रख दिया और तीन साल के लिए जेल की बात कर दी। तो मेरे ख्याल से असल में ये मुद्दा वोट की राजनीति का है।

इशरत जहां बीजेपी की सदस्य बनी हैं, उस पर आप क्या कहेंगे?
जाहिर है ये सीधे तौर पर राजनीति की बात है, अगर उस महिला का ताल्लुक सिर्फ अपने खानदान से होता तो वह सियासी पार्टी ज्वाइन नहीं करती। इससे साफ मालूम होता है कि इशरत जहां को बीजेपी ने इस्तेमाल किया है और उसको मुद्दा बनाकर सामने खड़ा करके ये बिल पार्लियामेंट में पेश किया है।

अगर बिल राज्यसभा में पास हो जाता है तो आप मुस्लिम महिलाओं को कैसे समझाएंगे ?
अगर ये बिल अभी जिस तरह से है वैसे ही पास हो जाता है तो यह हमारे मुल्क के लिए बदकिस्मती की बात होगी और हम महिलाओं को कहेंगे कि अगर वो सलामती चाहती हैं तो वे इस बिल के करीब भी न जाएं। क्योंकि यदि वे इस कानून के करीब जाती हैं तो उनके पति जेल में जाएंगे। आपस में विवाद बढ़ेगा, उनके बच्चे सड़कों पर मारे-मारे फिरेंगे। हम जानते हैं कि 60 फिसदी मुस्लिम महिलाएं ऐसे घरों की हैं जो गरीबी रेखा के नीचे अपनी जिंदगी गुजारती हैं। ऐसे में जाहिर है कि उनके पति अगर आपस में झगड़े करेंगे तो ये कानून उनको जेल में पहुंचा देगा। इसलिए मेरा महिलाओं से मशविरा है कि वो अपने- आप को बचाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए 21 फरवरी तक का समय दिया है इस पर आपकी क्या राय है?
देखिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आप कानून बनाइए, नहीं भी बनाएंगे तो सुप्रीम कोर्ट का कानून लागू रहेगा। इसलिए मेरे ख्याल से कानून बनाने की जरुरत ही नहीं है। जब सुप्रीम कोर्ट ने ये दोनों बातें कही हैं। तो सुप्रीम कोर्ट से अलग हटकर ये कानून क्यों बना है? सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को सिविल से हटाकर क्रिमिनल में लाने की बात नहीं की है। इन्होंने तो इससे बढ़कर एक तलाक को भी इसमें शामिल कर लिया है। इसका मतलब साफ इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाना है और मुस्लिम महिलाओं के पतियों को जेल में डालना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नियत साफ नहीं है क्या?
देखिए, हम तो ये समझते हैं कि मोदी जी अपनी उस पार्टी के नेता हैं जो यह कहती है कि पर्सनल लॉ को खत्म करना चाहिए, और पार्टी के नेता तो हमेशा बोलते रहते हैं कि यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना है। उन्होंने ने तो इसे बकायदा अपने मैनिफेस्टो में भी शामिल किया है। इसलिए मोदी जी उसी राह पर चले रहे हैं जिस राह को बीजेपी, आरएसएस दिखाती है।

देश में जातीय विद्रोह हर जगह शुरू हो रहा है, इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?
देखिए, यह जातीय विद्रोह कहीं भी हो मेरी नजर में ये गलत है। जातीय विद्रोह को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। इससे देश के लोग आपस में लड़ेंगे, देश की तरक्की रूक जाएगी। इससे शांति भंग होती है।

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