ऐसे बनेगी राजद सरकार, तेजस्वी बनेंगे मुख्यमंत्री

क्या बिहार में नीतीश सरकार सियासी संकट में घिरने जा रही है। बिहार से मिलनेवाले संकेत तो यही इशारा कर रहे हैं। राजद पर दवाब बनाने के चक्कर में शायद नितीश ने बड़ी सियासी गलती कर दी है।

जिस वक़्त जदयू तेज़स्वी को इस्तीफा देने कह रहा था, तभी लालू ने अपने सभी मंत्रियों से इस्तीफा ले लिया। यह खबर मिलते ही जदयू के रणनीतिकारों के हाथ-पांव फूल गए। तुरंत डैमेज कंट्रोल शुरू हुआ। तेज़स्वी से नीतीश की लम्बी मुलाकात हुई। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। लालू ने कांग्रेस को इस बात के लिए मना लिया कि विकल्प की स्थिति में पार्टी राजद को समर्थन करेगी। आज की ताज़ा स्थिति यह है कि लालू 80+ 27= 107 के संख्या गणित पर खड़े हैं। जदयू के अंदर से तकरीबन 25 ऐसे विधायक हैं जो तकनीकी तौर पर जदयू के सिंबल पर जीते जरुर हैं लेकिन हैं वो राष्ट्रीय जनता दल के। जब भी सरकार बनने की वैकल्पिक स्थिति होगी तो वो लालू के साथ होंगे।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नीतीश कुमार को इस सियासी गणित का आकलन नहीं था। भाजपा ने जो भी सब्जबाग दिखाया हो पर राजनीति के चाणक्य कहे जानेवाले नीतीश ने कैसे इतनी बड़ी गलती कर दी। जो बिहार की राजनीति को जानते हैं, वो यह भी जानते हैं कि लालू और नीतीश कभी भी स्वाभाविक मित्र नहीं हो सकते हैं। लेकिन भाजपा के विरोध में साथ होकर नीतीश ने लालू के साथ महागंठबंधन बनाया था, जिसे भाजपा हर कीमत पर अस्थिर करना चाहेगी। यह नीतीश के सलाहकार लगता है उन्हें नहीं समझा पा रहे। जहाँ तक नीतीश की छवि का सवाल है, क्या लालू के साथ आने से पहले यह नीतीश ने नहीं सोचा था। ऐसे में बिहार एक बार फिर द्वंद् के चौराहे पर खड़ा है। राजकाज ठप है। सियासत हांफ रही है, बिहारी पशोपेश में हैं।

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