मजदूरों ने सरकार से पूछा, खाते में कब आएंगे एक-एक लाख रुपए

अंतराष्ट्रीय मजदूर दिवस के दिन बिहार की राजधानी पटना में मजदूर वर्ग मजदूरी करने के लिए बेबस हैं। उनके कंधों पर खुद की पेट भरने के साथ घर वालों की भी पेट भरने की जिम्मेदारी है। आज भी सरकार से वो उतनी ही खफ़ा हैं, जितनी पिछली सरकार से थे। उनका मानना है कि न कांग्रेस सरकार मजदूरों के हित के लिए काम की, और ना ही बीजेपी सरकार ने की। नतीजतन मजदूरों की समाज में जस की तस स्थिति बनी हुई है।

काम की तलाश में बोरिंग रोड चौराहे पर बैठे सतीश कुमार ने बताया कि रोज हमलोगों को यहीं बैठकर मालिक का इंतजार करना पड़ता है। काम मिल गया तो ठीक है, वर्ना किसी से कर्ज लेकर खाने पीने का बंदोबस्त करना पड़ता है। रोजगार सुनिश्चित नहीं है, जो सबसे दिक्कत की बात है। मोदी सरकार ने वायदे किए थे, सभी मजदूरों को रोजगार सुनिश्चित किया जायेगा, बैंक खाते में एक-एक लाख रुपया भेजा जायेगा। वो सब कुछ नहीं हुआ। रोटी, कपड़ा, मकान, के लिए आज भी हमलोग इधर से उधर भटक रहे हैं।

गौरतलब है कि अन्य देशों की तूलना में मजदूरों की स्थिति भारत में कुछ ज्यादा ठीक नहीं है। रोजगार सुनिश्चित नहीं होने की वजह से पलायन यहां की मुख्य समस्या है।

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