सरयू और अर्जुन की जुगलबंदी क्या गुल खिलायेगी !

कद्दावर भाजपा नेता अर्जुन मुंडा भी मंत्री सरयू राय के उठाये सवालों के जरिये रघुवर सरकार को घेर रहे हैं. जिस तरह हाल के दिनों में मंत्री सरयू राय की नाराजगी सामने आयी है और जिस तरह अर्जुन मुंडा खुलकर सरयू राय के उठाये प्रश्नों पर उनका समर्थन कर रहे हैं, उसने भाजपा के दिग्गजों की नींद उड़ा दी है. ऐसे भी भाजपा के तमाम आदिवासी नेता प्रकारांतर से रघुवर के विरोध में ही खड़े दिखते हैं. पत्थलगढ़ी प्रकरण में जिस तरह सरकार ने राजनीतिक स्टैंड लिया है, उससे भी राज्य के आदिवासी नेताओं का पारा और चढ़ गया है. खासतौर पर कोल्हान की एक सभा में मुख्यमंत्री ने जिस भाषा का इस्तेमाल किया है, वो आदिवासी नेताओं को बेहद नागवार गुजरा है.

इसी बीच अर्जुन मुंडा ने देवघर में जिस तरह सरयू राय के द्वारा पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा पर उठाये गए सवालों को वाजिब कहा है और मुख्यमंत्री से इसे स्पष्ट करने की मांग की है. वह गंभीर है. अमूमन अर्जुन मुंडा सरकार के कामकाज पर कुछ नहीं बोलते. ऐसे में इनके द्वारा एक तरह से सफाई माँगना झारखण्ड की राजनीति को गर्म कर रहा है.

कोल्हान के दो बड़े नेता अगर गोलबंद हो रहे हैं तो इससे सत्ता के चल रहे समीकरण बदल भी सकते हैं. भाजपा के कई नेता ऑफ द रिकॉर्ड बताते हैं कि राजबाला वर्मा के मामले में पहले ही पार्टी की भद्द पिट चुकी है. अब अगर इसे अर्जुन मुंडा जैसे वरिष्ठ नेता भी उठाते हैं तो यह मामला और तूल पकड़ेगा. सरयू राय इस मसले को अंजाम तक पहुँचाने का निश्चय कर ही चुके हैं. देखते हैं होली बाद इस प्रसंग में और कितने रंग दिखते हैं या कईयों की होली बदरंग हो जाती है.

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