सिल्ली, गोमिया को लेकर एनडीए में फूट, विपक्ष एकजुट!

झारखंड में गोमिया और सिल्ली विधानसभा उपचुनाव को लेकर राज्य की सियासी पार्टियां तैयारियों में लग गई हैं। इसको लेकर रणनीति बनाई जा रही है। कोशिश की जा रही है कि उपचुनाव में उनकी दावेदारी ठीक से हो। निकाय चुनावों के बाद सत्ताधारी दलों के साथ ही विपक्ष भी इन दो सीटों के चुनाव को लेकर इस क्षेत्र के साथ ही पार्टी के अंदर भी लगातार विमर्श कर रहा है। इधर, कहा जा रहा है कि दोनों सीटों को लेकर बीजेपी और उसकी सहयोगी आजसू पार्टी के बीच खटास बढ़ता जा रहा है। गोमिया सीट पर आजसू के दावे और तैयारियों को देखते हुए बीजेपी ने भी सिल्ली से चुनाव लडने की तैयारी शुरू कर दी है। बीजेपी वहां से पार्टी के सांसद रामटहल चौधरी के पुत्र और रांची ग्रामीण जिला बीजेपी अध्यक्ष रणधीर कुमार चौधरी को उप चुनाव लड़ा सकती है। वहीं दूसरी ओर सिल्ली आजसू का गढ़ रहा है। वहां से आजसू प्रमुख सुदेश महतो चुनाव लड़ते आये हैं। लेकिन 2014 में हुए विधान सभा चुनाव में वह झामुमो के अमित महतो से हार गये थे।

वहीं, कहा जा रहा है कि बीजेपी गोमिया उपचुनाव खुद लड़ना चाहती थी और सिल्ली सीट आजसू के लिये छोड़ने को तैयार थी। लेकिन इस बीच आजसू ने दोनों सीटों पर दावा ठोक दिया। आजसू उपाध्यक्ष उमाकांत रजक ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस में ऐलान किया कि पार्टी गोमिया और सिल्ली दोनों उपचुनाव लड़ेगी। इन सीटों पर पार्टी बहुत पहले से काम कर रही है। रजक ने यह भी कहा कि बीजेपी चाहे तो वह भी गोमिया से लड़े, आजसू तो लड़ेगी ही। इसका गठबंधन पर असर पड़ने के बारे में पूछे जाने पर रजक ने कहा है कि स्थायी सरकार के लिए आजसू ने बीजेपी का समर्थन किया था। लेकिन मौजूदा सरकार की सभी नीतियां झारखंड विरोधी हैं। रजक ने कहा है कि यदि दोनों सीटों पर जीत मिली तो पार्टी 2019 के चुनाव को लेकर बड़ा फैसला कर सकती है। रजक के इस बयान के बाद बीजेपी ने अपनी रणनीति बदलते हुए सिल्ली और गोमिया दोनों उपचुनाव लड़ने का फैसला किया। सूत्रों के अनुसार गोमिया से पूर्व विधायक माधव लाल सिंह और छत्रुराम महतो बीजेपी के टिकट के प्रबल दावेदार हैं। उधर आजसू कोटे से मंत्री चन्द्रप्रकाश चौधरी के आप्त सचिव रहे लंबोदर महतो गोमिया में पहले से ही अपने पक्ष में प्रचार कर रहे हैं। ऐसे में गोमिया और सिल्ली विधान सभा उप चुनाव को लेकर बीजेपी-आजसू गठबंधन में दरार गहराता नजर आ रहा है।

वहीं दूसरी ओर झामुमो ने सिल्ली में अमित महतो की पत्नी और गोमिया में योगेंद्र प्रसाद की पत्नी को चुनाव लड़ाने पर विचार कर रही है। कहा जा रहा है कि इससे अन्य लोगों की दावेदारी को खत्म किया जा सकेगा, वहीं दूसरे दलों को भी इस मसले पर साथ लाया जा सकता है। वैसे झामुमो के लिए ज्यादा माथापच्ची करने की नौबत आती नहीं दिख रही है क्योंकि राज्यसभा चुनाव के वक्त ही कांग्रेस ने विस चुनाव तालमेल के साथ लड़ने की बात कही है। वहीं झाविमो ने भी ऐसे संकेत दिए हैं कि वह उपचुनाव में इन सीटों से प्रत्याशी नहीं उतारेगा। जानकारों की मानें तो निकाय चुनाव के बाद विपक्ष को यह समझ आने लगा है कि बीजेपी को हराने के लिए गठबंधन की जरुरत है। अगर विपक्ष अलग-अलग चुनाव में उतरता है तो वोटों के बिखराव से सत्ताधारी दल को फायदा होना तय है।

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