2014 जैसे नहीं हैं हालात JDU की BJP को नसीहत

बिहार में लोकसभा चुनाव को लेकर सियासत गरमाने लगी है। सत्ताधारी कुनबे में सीटों को बंटवारे को लेकर घमासान मचा हुआ है। नेताओं के बयानबाजी से सियासी गलियारों में खूब चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि एनडीए के कई सहयोगी दल लोकसभा चुनाव आते-आते बीजेपी से किनारा कर सकते हैं। बता दें कि एनडीए की सहयोगी पार्टी जदयू ने सीट बंटवारे को लेकर अपने तेवर सख्त कर लिए हैं।
बताया जा रहा है कि जहां एक ओर बीजेपी पिछले लोकसभा चुनाव के आधार पर टिकट बंटवारे करने की बात कह रही है तो वहीं दूसरे दल ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं। उधर, जदयू के नेताओं का कहना है कि 2014 के लोकसभा चुनाव के नतीजों को लेकर बातचीत नहीं की जा सकती है क्योंकि अब वैसे हालात नहीं है और स्थितियां बीजेपी के पक्ष में उस प्रकार से नहीं हैं। वहीं जदयू 2015 में हुए विधानसभा चुनाव के आधार पर टिकटों में हिस्सेदारी चाहता है। बता दें कि इस विधानसभा चुनाव में जदयू ने बेहतर प्रदर्शन किया था, हालांकि उस वक्त जदयू का गठबंधन राजद के साथ था। उधर, एनडीए की अन्य सहयोगी पार्टियां जदयू की मांग को लेकर खफा बतायी जाती हैं कहा जा रहा है कि लोजपा, रालोसपा ने जदयू के इस प्रकार के किसी दबाव का विरोध किया है। वहीं बीजेपी नेताओं का कहना है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में जब जदयू अकेले 40 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, तो महज उन्हें दो सीटों पर ही जीत दर्ज हुई थी। जबकि बीजेपी को 22 सीटें मिली थी।
बहरहाल, सीटों के बंटवारे को लेकर जिस प्रकार की खींचतान हो रही है उसने विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए मौका दे दिया है। विपक्ष की ओर कांग्रेस और राजद ने नीतीश और कुशवाहा को महागठबंधन में शामिल होने का न्योता दे दिया है।

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