बैकफुट पर आए विधायक शिवशंकर उरांव

स्थानीय नीति और नियोजन नीति पर सरकार को घेरने में अब तक अहम भूमिका निभा रहे बीजेपी विधायक शिवशंकर उरांव अब खुद को घिरता देख बैकफुट पर आ गए हैं। उन्होंने इस बाबत मीडिया को एक पत्र लिखा है, श्री उरांव ने कहा है कि राज्य की जनता ने अपने हित में नीति निर्धारित करने की जिम्मेदारी अपने जनप्रतिनिधियों को सौंपी है। बहुमत प्राप्त पार्टी को सरकार गठन करने और चलाने का लोकतांत्रिक दायित्व है। वहीं सत्ताधारी दल के प्रतिनिधि समय-समय पर सदन पटल पर और सरकार में अपने नेता के समक्ष अपनी बातों को रखते हैं, यह स्वाभाविक प्रक्रिया है लेकिन हाल में समाचार पत्रों और अन्य माध्यमों से इस स्वाभाविक प्रक्रिया को तोड़-मरोड़ कर और अपने दृष्टिकोण के साथ प्रकाशित प्रसारित किया गया।

उन्होंने मीडिया संस्थानों पर मामले को सनसनीखेज बनाए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य स्थानीयता, नियोजन नीति, जिला रोस्टर, आरक्षण नीति को लेकर सत्तासीन दल के जनप्रतिनिधियों द्वारा सामूहिक रुप से अपनी सरकार और सदन के नेता के समक्ष रखे गए प्रस्ताव को जिस प्रकार सरकार विरोधी कदम बताया गया वह चिंताजनक है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि जनता की भावनाओं और सवालों को सरकार और नेता के समक्ष संवैधानिक और अनुशासित तरीके से रखेंगे ही, यह उनका दायित्व भी है। पर यह किसी भी प्रकार से सरकार विरोधी कदम या असंतोष नहीं है। उन्होंने कहा कि जैसी बातें मीडिया में कही जा रही हैं उसका मैं खंडन करता हूं। इसके साथ ही विधायकों द्वारा सीएम को दिए गए सुझावों में से एक प्रमुख बिंदु पर सरकार द्वारा तुरंत संज्ञान लेते हुए उच्च स्तरीय कमिटी गठित कर सुधार हेतु अध्ययन कराए जाने के निर्णय का स्वागत करता हूं।

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