शिवानंद तिवारी ने अशोक चौधरी को सुनाया हितोपदेश

राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी को हितोपदेश सुनाया है. शिवानंद तिवारी ने हितोपदेश के बहाने अशोक चौधरी को यह याद दिलाने की कोशिश की है कि नीतीश ने लोगों को यूज एंड थ्रो किया है. उन्होंने अंदेशा जताया है कि कहीं नीतीश अशोक चौधरी के साथ भी यही नहीं करें.

शिवानंद ने कहा है कि हितोपदेश की पुरानी कहानी है. शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, दाना डालेगा, फँसना मत. लेकिन इसके बावजूद लोग फँस ही जाते हैं. जैसे बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी अभी नीतीश कुमार की जाल में फँस गए. अशोक के सामने उदय नारायण चौधरी का नज़ीर था. चौधरी जी ने नीतीश की माया में क्या-क्या पाप नहीं किया. आठ विधायकों की सदस्यता तक समाप्त की. अगर उन विधायकों की सदस्यता नहीं गई होती तो बहुत मुमकिन था कि राज्यसभा के तत्कालीन चुनाव में नीतीश के उम्मीदवार हार गए होते. 2014 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी बुरी तरह परास्त हुई थी. तीसरे स्थान आ गई थी. उनकी तथाकथित धवल छवि को उस चुनाव में जनता ने ख़ारिज कर दिया था. राज्यसभा के चुनाव में अगर पराजय हो गया होता तो शायद उनकी पार्टी नहीं बचती.

कह सकते हैं कि आठ विधायकों की सदस्यता समाप्त कर उदय जी ने नीतीश कुमार की राजनीति को बचा लिया था. उन उदय नारायण चौधरी की क्या गति नीतीश जी ने की है, इसको देखते हुए अशोक कैसे उस आदमी के जाल में फँस गए! अगर फ़ेहरिस्त बनाई जाए तो दर्जनों ऐसे लोग मिलेंगे, जिनको नीतीश ने गुमनामी के अंधेरे में ढकेल दिया है. आज उनका अता-पता नहीं है.

शिवानंद तिवारी ने कहा कि समाजवादी विचार के मज़बूत साथी और समता पार्टी के स्थापना काल से जुड़े दिग्विजय सिंह तो इनसे संघर्ष में दुनिया ही छोड़ गए. राजद नेता ने कहा है कि वह अशोक चौधरी को लंबे समय से जानते हैं और उनकी कामना है कि अशोक चौधरी के साथ भी वही सब ना हो, जो नीतीश कुमार ने अन्य लोगों के साथ किया.

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