हवाबाजी कर रहे हैं शरद यादव

जदयू सांसद शरद यादव लगातार सियासी हवाबाजी कर रहे हैं। हमेशा नीतीश कुमार तथा लालू यादव की बैशाखी लेकर बिहार में राजनीति करने वाले शरद यादव इन दिनों अपने हिरावल दस्ते से तरह-तरह की बयानबाजी करा रहे हैं। जिस मधेपुरा से शरद यादव हार गए, वहीं के पूर्व विधायक विजय वर्मा और कुछ शागिर्दों के जरिये शिगूफा छोड़ रहे हैं कि शरद यादव अपनी पार्टी खड़ी करेंगे। जो लोग शरद यादव को जानते हैं, उन्हें पता है कि अपने दम पर शरद मुखिया का चुनाव भी नहीं जीत सकते हैं। दरअसल वो नीतीश से बार्गेन कर रहे हैं ताकि केंद्र में उनका मंत्रीपद सुरक्षित हो जाये।

मध्यप्रदेश के शरद यादव लगातार बिहार से जीतकर संसद में जाते रहे हैं। समाजवादी शरद यादव की सियासत लालू के साथ चली, तब इनके रिश्तेदार रंजन यादव की खूब चलती थी। रंजन जैसे लोग लालू दरबार से बेदखल हुए तो शरद नीतीश और जार्ज फ़र्नान्डिस के साथ आ गए। जब जार्ज और नीतीश कुमार के बीच तकरार शुरू हुआ तो नीतीश के साथ आकर ये जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हो गए। लेकिन कुछ ही समय बाद नीतीश कुमार को लग गया कि ये कभी भी उनके लिए सियासी संकट खड़ा कर सकते हैं। फिर जीतनराम मांझी प्रकरण में इनका असली चेहरा उजागर हो गया। पहले तो इन्होने जीतनराम से कहा कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा मत दो, जब जीतनराम मांझी इनके काबू से बाहर हो गए तो ये सियासी स्यापा करने लगे। तबतक नीतीश कुमार इनकी चाल समझ चुके थे। इसलिए मौका आते ही नीतीश ने इन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से चलता किया और खुद अध्यक्ष बन बैठे।

अभी नीतीश कुमार रातों-रात भाजपा के हो गए। 24 घंटे के अंदर एनडीए की तरफ से मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली और अपनी पार्टी के तय टूट को बचा लिया। जबतक शरद कुछ समझते नीतीश ने पार्टी के अंदर भी बाज़ी पलट दी। अब शरद क्या करें। नीतीश कुमार ने पूछा तक नहीं। बार्गेन करने की क्षमता है नहीं तो खबरों में बने रहने के लिए कुछ- कुछ बोल रहे हैं। लालू को भी क्या चाहिए...शरद जितना बोलें, उतना अच्छा....पर राजनीति के जानकार बताते हैं कि शरद मोल-तोल की हैसियत में नहीं हैं। वैसे राजनीति और क्रिकेट के बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *