शरद तो गांधी मैदान पहुंच गए, अब क्या!

रविवार को पटना के गांधी मैदान में लालू प्रसाद की रैली में पहुंच कर जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने अपना पुराना तेवर और ठेठ अंदाज़ दिखाया। अब क्या करेंगे नीतीश! तकनीकी तौर पर शरद को पार्टी से अलग करेंगे। पर शरद यादव तो खुद ही अलग हो चुके। उन्होंने तो बता दिया कि अब वो अपनी राह चुन चुके हैं। नीतीश की कार्यशैली से परेशान शरद ने सामाजिक न्याय का अपना मंडलवादी रास्ता अख्तियार कर लिया।

जेडीयू के निशान को लेकर चुनाव आयोग में तकनीकी लड़ाई लड़ रहे शरद यादव को पता है कि बिहार में लालू के साथ चलना ही ज्यादा सुरक्षित है। अगर वो चुनाव आयोग में हार भी जाते हैं तो नीतीश से नाराज जेडीयू नेताओं का मंच बनाकर बिहार से दिल्ली तक नीतीश की छीछालेदर करते रहेंगे। राजनीतिक पुनर्वास तो लालू के साथ मिलकर हो ही जायेगा।

इसलिए अब जेडीयू शरद यादव को निकालती भी है तो शरद सामाजिक न्याय का शहीद बनकर बिहार में घूमेंगे। नीतीश और भाजपा की बेमेल दोस्ती की कथाएं गढ़ेंगे। केवल यह देखना शेष है कि जेडीयू कब शरद की राज्यसभा सदस्यता रद्द करने की मांग करता है।

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