‘तीर’ के लिए शरद को करना होगा इंतजार

जेडीयू की पार्टी चिह्न 'तीर' पर शरद यादव की याचिका पर फ़िलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने कोई अंतरि‍म आदेश देने इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि अभी तो चुनाव आयोग ने ही अपना विस्तृत आदेश नहीं दिया है तो कोर्ट इस पर कोई आदेश कैसे कर सकता है. गुजरात चुनाव में चुनाव चिह्न तीर देने की मांग करते हुए दिल्ली हाइकोर्ट में ये याचिका दायर की गयी है.

हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग के वकील से पूछा है कि वो 23 नवंबर को उन्हें बताए की चुनाव आयोग इस पर अपना विस्तृत आदेश कब तक देगा. जिससे कोर्ट को ये पता चल सके कि चुनाव आयोग के निर्णय के पीछे के स्पष्ट कारण क्या है. वरिष्ठ नेता शरद यादव के नेतृत्व वाली जेडीयू के विधायक और गुजरात के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष छोटूभाई वासवा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट 23 नवंबर को दोबारा सुनवाई करेगा.

17 नवंबर को चुनाव आयोग शरद यादव की चुनाव चिह्न तीर देने की मांग को खारिज कर चुका है. चुनाव आयोग ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि शरद की पार्टी कोई ठोस दस्तावेज नहीं पेश नहीं कर सकी और नीतीश कुमार की अध्यक्षता वाली पार्टी ही असली जेडीयू है. हाइकोर्ट में लगाई गई याचिका मे आयोग के इस फैसले को रद्द करने की अपील की गयी है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि गुजरात चुनाव में फर्स्ट फेज का नामांकन पूरा हो चुका है. वहीं, दूसरे फेज का नामांकन अगले 10 दिन में पूरा हो जाएगा. ऐसे में तीर का चुनाव चिह्न कौन इस्तेमाल करेगा यह जल्द तय किया जाना जरूरी है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरफ से पेश हुए वकील गोपाल सिंह ने कोर्ट को कहा कि चुनाव आयोग ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया है. आयोग के फैसले के मुताबिक उनकी पार्टी के प्रत्याशियों ने तीर के निशान के साथ गुजरात चुनाव में नामांकन कर दिया है. ऐसे में याचिका खारिज की जाए. गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाने के बाद से शरद यादव, नीतीश कुमार से नाराज चल रहे हैं. इसके बाद ही उन्होंने चुनाव आयोग में पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा किया था.

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