राज्यसभा में सात बिल पास,विपक्षी दलों ने सदन की कार्यवाही का किया बहिष्कार

राज्यसभा के आठ सांसदों के निलंबन के मुद्दे को विपक्ष ने मंगलवार को सदन में उठाया. कांग्रेस समेत विपक्षी दलों की मांग है कि सभी आठ सांसदों का निलंबन वापस लिया जाए. लेकिन राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. वहीं, विपक्षी दलों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला लिया, जिसका फायदा सरकार को मिला. सदन से विपक्ष के सांसदों के नदारद रहने के कारण सरकार आज सात बिल पास कराने में सफल रही. 

ये सात बिल हुए पास

राष्ट्रीय न्यायालिक विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक, 2020

कंपनी (संशोधन) विधेयक, 2020 

बैंककारी विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020

आवश्यक वस्तु विधेयक, 2020

प्रौद्योगिकी संस्थान विधियां विधेयक, 2020 

राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय विधेयक, 2020 

कराधान और अन्य विधि विधेयक, 2020

बचे हुए सत्र का बहिष्कार

कांग्रेस ने मॉनसून सत्र के बहिष्कार का ऐलान किया है. कांग्रेस के सदस्यों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया. कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), डीएमके, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप), वामदल, आरजेडी, टीआरएस और बीएसपी ने भी कार्यवाही का बहिष्कार किया.

वापस हो सांसदों का निलंबन

बता दें कि 20 सितंबर को किसानों से जुड़े बिल को पास कराने के दौरान विपक्षी दलों के 8 सांसदों ने राज्यसभा में हंगामा किया. इसके बाद सोमवार को सभापति वेंकैया नायडू ने आठ सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया था. इसके बाद सभी सांसद, संसद परिसर में ही धरने पर बैठ गए थे. विपक्ष की मांग है कि सभी 8 सांसदों का निलंबन वापस हो. तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन, कांग्रेस के राजीव सातव, रिपुन बोरा, नासिर हुसैन, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, के.के. रागेश और माकपा के ई. करीम को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया है.

गुलाम नबी आजाद ने की घोषणा

आज सुबह जैसे ही राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, कांग्रेस ने यह मसला उठाया. कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जब तक हमारे सांसदों के संस्पेंशन को वापस नहीं लिया जाता और किसान के बिलों से संबंधित हमारी मांगों को नहीं माना जाता तब तक विपक्ष सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करेगा. 

लोकसभा से भी वॉकआउट

राज्यसभा से निलंबित सांसदों का मामला लोकसभा में भी उठा. विपक्ष के सांसदों ने इस मुद्दे को उठाया. इसपर स्पीकर ने कहा कि राज्यसभा का मामला यहां नहीं उठ सकता. कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने ये भी मांग की कि सरकार कृषि बिल को वापस ले. अधीर रंजन को जवाब देते लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि एक बार जो विधेयक पास हो गया वो वापस नहीं होगा. 5 घंटे 13 मिनट की बहस के बाद बिल पारित हुआ और आप लोगों ने बहस में हिस्सा लिया. इसके बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि बिल पर बयान दिया और कांग्रेस पर निशाना साध. अपनी मांगों को लेकर विपक्षी दलों के सांसद लोकसभा से भी वॉकआउट कर गए. 

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