हजारीबाग डीसी रहते सुनील कुमार ने सरकारी जमीन कर दी वाइफ के नाम

ध्यान से इस रिपोर्ट को पढ़िए. यह मामला क्लैश ऑफ़ इंटरेस्ट और डंके की चोट पर किये गए भ्रष्ट्राचार का है. वर्तमान भवन निर्माण सचिव और भवन निर्माण निगम के एमडी सुनील कुमार ने हजारीबाग उपायुक्त रहते सरकारी जंगली जमीन का ना केवल नेचर बदलवाकर उसे रैयती किया बल्कि उसे चालाकी से पत्नी रंजना कुमार के नाम ट्रान्सफर करवा दिया.

स्थानीय लोगों के विरोध के बाद भी सुनील कुमार ने अपने पद और पॉवर का दुरूपयोग किया. आज अवैध रूप से स्थानांतरित की गयी इस जमीन पर आईएएस सुनील कुमार की पत्नी रंजना कुमार का पेट्रोल पंप चल रहा है. इस मामले में चौपारण के सामाजिक कार्यकर्ता अशोक ठाकुर ने झारखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी. उच्च न्यायालय ने इस मामले को आगे की जांच और कार्रवाई के लिए विजिलेंस में भेजने का निर्देश दिया और प्रार्थी को विजिलेंस में जाने को कहा. तबसे यह मामला विजिलेंस में पड़ा हुआ है. विजिलेंस में यह मामला ठंडे बस्ते में क्यों पड़ा हुआ है, इसे आसानी से समझा जा सकता है. इतने रसूख वाले अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होती है क्या ! अब प्रार्थी ने दोबारा हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
हजारीबाग जिले के चौपारण अंचल के केंदुआही दनुवा का यह मामला प्रदेश में महाघोटाले और रसूख के दम पर किये जानेवाले भ्रष्ट्राचार की कलई खोलता है. स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो तत्कालीन उपायुक्त ने स्थानीय लोगों के विरोध के बाद सरकारी जमीन की जमाबंदी बदलवाई और इसे किसी अख्तर अली के नाम से करवा दिया फिर तुरत फुरत राष्ट्रीय राजमार्ग 2 के किनारे की यह बेशकीमती जमीन अख्तर अली से सुनील कुमार की पत्नी रंजना कुमार के हाथों चली गयी.चौपारण अंचल के खाता संख्या 57, प्लाट नंबर 368 की सरकारी जंगली जमीन का ग्रामीणों के विरोध के बावजूद जमाबंदी बदलना शासकीय भ्रष्ट्राचार की पोल खोलता है.
ग्रामीणों ने जब अंचल अधिकारी से इस जमाबंदी के खेल की जानकारी मांगी तो सीओ ऑफिस की ओर से कहा गया कि इस जमीन का लैंड रिकॉर्ड उपलब्ध ही नहीं है. आखिर किसके इशारे पर गायब हुए ये लैंड रिकार्ड्स! जब ग्रामीणों ने इस धोखाधड़ी के खिलाफ आमरण अनशन किया तो तत्कालीन अपर समाहर्ता हजारीबाग ने स्थल निरीक्षण किया और ग्रामीणों के दावे को सही पाया. इसके बाद बरही अनुमंडल के एसडीओ को दिए आदेश में हजारीबाग के तत्कालीन अपर समाहर्ता ने स्पष्ट लिखा है कि गैर मजरुआ जमीन की संदिग्ध जमाबंदी को निरस्त करने की कार्रवाई करें और सभी पक्षों को नोटिस कर कागजातों की जांच करें.
इधर कागजी घोड़े दौड़ते रहे और दूसरी तरफ सुनील कुमार की पत्नी का पेट्रोल पंप बनकर तैयार होता रहा. पेट्रोल पम्प के अलावा आसपास की कई एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया गया.



इस संबंध में पूछे जाने पर झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार कहते हैं कि प्रदेश के अधिकांश नौकरशाह बेलगाम और स्पष्ट हैं. उन्हें कानून से डर नहीं लगता. वह सवाल उठाते हैं कि जब पूर्व मुख्य सचिव एसके चौधरी और उनकी आईपीएस पत्नी पर ऐसे ही गलत तरीके से रांची में हाउसिंग की जमीन आबंटन और कब्जा करने के मामले में एफआईआर का आदेश हो सकता है तो इस मामले में क्यों नहीं. राजीव कुमार यहीं नहीं रुकते, वह सवाल उठाते हैं कि विजिलेंस गृह सचिव के मातहत है.

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