दहेज प्रताड़ना केस में SC ने बदला फैसला, अब तुरंत होगी पति की गिरफ्तारी

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामले (498 A) में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आज अहम फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने पुराने फैसले में संशोधन करते हुए कहा है कि मामले की शिकायत की जांच के लिए कमेटी की ज़रूरत नहीं है। पुलिस को ज़रूरी लगे तो वह आरोपी को गिरफ़्तार कर सकती है।

कोर्ट ने कहा कि आरोपी के लिए अग्रिम ज़मानत का विकल्प खुला हुआ है। कोर्ट ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर लगी रोक हटाते हुए कहा कि विक्टिम प्रोटेक्शन के लिए ऐसा करना जरूरी है। दरअसल, इसी साल अप्रैल माह में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

पिछले साल 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने अपने पुराने फैसले में कहा था कि आईपीसी की धारा-498 ए यानी दहेज प्रताड़ना मामले में गिरफ्तारी सीधे नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दहेज प्रताड़ना मामले को देखने के लिए हर जिले में एक परिवार कल्याण समिति बनाई जाए जो शिकायत के पहलुओं पर जांच करें और समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही ज़रूरी हो तो गिरफ्तारी होनी चाहिए, उससे पहले नहीं।

दरअसल, जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यूयू ललित की दो जजों की बेंच ने महिलाओं के लिए बने कानूनों के दुरुपयोग के मामले को लेकर अहम निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न कानून के दुरुपयोग की शिकायतों को देखते हुए ऐसे मामलों में तत्काल गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी थी।

इसके अनुसार दहेज प्रताड़ना के मामलों में अब पति या ससुराल वालों की तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी। दहेज प्रताड़ना यानी आईपीसी की धारा 498-ए के दुरुपयोग से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने अहम कदम उठाते हुए इस सिलसिले में कुछ दिशा-निर्देश जारी किए थे।

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