क्या सरयू राय को मिला BJP हाईकमान का साथ !

होली तक इंतजार कीजिए, खूब अबीर गुलाल और रंग खेलिए क्योंकि उसके बाद सूबे की सियायत में जो रंग बिखरने वाला है उसका उद्घोष हो चुका है। जी हां, प्रदेश के मंत्री और कद्दावर नेता सरयू राय ने अदावत के संकेत दे दिए हैं। उन्होंने दो टूक कह दिया है कि मुद्दों पर टूटना मंजूर है पर झुकना मंजूर नहीं है। अब सवाल ये उठता है कि सरयू राय करो या मरो के मूड में क्यों हैं।

देखा जाय तो सीएस की कार्यशैली पर तो वो पहले भी कई बार आपत्ति दर्ज करा चुके थे लेकिन उनकी नाराजगी चरम सीमा उस समय पार कर गई जब राज्य में भूख से हुई मौतों को लेकर बवाल हो गया। इसमें उनके विभाग पर भी उंगलियां उठीं और विपक्ष ने निशाने पर लिया। उस वक्त श्री राय ने खुले तौर पर सीएस राजबाला वर्मा को इन मौतों का जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि सीएस के आदेश द्वारा आधार नहीं रहने पर 11.50 लाख लोगों के राशन कार्ड रद्द किए गए। इसके बाद तो एक के बाद एक आरोप सीएस पर लगते रहे कभी चारा घोटाला, बेटे को अनुचित लाभ से लेकर पीएमो से आई चिट्ठी में सीनियर आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को बचाने के आरोप।

जानकारों की मानें तो सरयू राय कई मौकों पर सीएम से कैबिनेट की बैठकों में हुए फैसलों को लेकर गंभीर आपत्ति जता चुके हैं लेकिन सीएम ने उनकी एक न सुनी और ये सबकुछ सीएस की इशारे पर हुआ जिसकी सूचना उन्हें देर-सबेर मिल जाती थी। इसलिए जैसे ही सीएस राजबाला पर गंभीर आरोप लगे सरयू राय एकदम से खुलकर सामने आ गए।

उधर, स्थानीय नीति और नियोजन नीति को लेकर हुए विवाद ने विधायकों को सरकार के खिलाफ गोलबंद कर दिया। पार्टी में सरकार और सीएम के खिलाफ पनपते विरोध की आवाज दिल्ली तक पहुंची, एक-एक कर प्रदेश के सभी बड़े नेताओं की राय ली गई। जानकारों की मानें तो हाईकमान राज्य में कोई बड़ा डैमेज झेलने के मूड में नहीं है, कई राज्यों में चुनाव हैं इसलिए अगर कोई उठापटक होता है तो इस मैसेज का असर वहां भी पड़ेगा। हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि राज्य के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव नहीं हो सकता है। लेकिन इतना तो तय है कि हाईकमान भी हमेशा चुप नहीं रहेगा जल्द ही सस्पेंस से पर्दा उठेगा।

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