सरयू राय ने राजबाला के बहाने सरकार पर साधा निशाना !

सरकार के मंत्री सरयू राय ने एक बार फिर पूर्व सीएस राजबाला के बहाने सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा है कि विगत 6 मार्च 2018 की मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए निर्णयों के बारे में मुख्यमंत्री सचिवालय से संबद्ध जनसम्पर्क विभाग की टीम ने समाचार माध्यमों में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी किया है जिसकी छाया प्रति संलग्न है इस विज्ञप्ति के अंत में अन्यान्य शीर्षक के तहत उल्लेख किया गया है कि "राजबाला वर्मा, भारतीय प्रशासनिक सेवा, 1983 बैच के अधिकारी जो 35 वर्षों की सेवा के बाद 28 फरवरी 2018 को सेवानिवृत हुई, को एक कुशल एवं दक्ष प्रशासक के रुप में तथा मुख्य सचिव के पद पर सराहनीय एवं उत्कृष्ट कार्य करने तथा अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के लिये मंत्रिपरिषद ने आभार प्रकट किया तथा उन्हें भविष्य के लिये शुभकामनायें दी।"

सरयू राय ने कहा है कि जहां तक मुझे याद है कि सेवानिवृत मुख्य सचिव के प्रति आभार व्यक्त करने का इस तरह का औपचारिक निर्णय उस दिन की मंत्रिपरिषद की बैठक में नहीं हुआ। नवनियुक्त मुख्य सचिव ने अपने स्तर से जो कुछ बैठक के अंत में कहा उसका आशय वैसा कुछ भी नहीं था जैसा कि इस प्रेस विज्ञप्ति में उल्लिखित है। फिर किस आधार पर और किसके निर्देश से "मुख्यमंत्री सचिवालय से संबद्ध पीआरडी टीम" ने सेवानिवृत हो चुकी मुख्य सचिव को इनके 35 वर्षों के कार्यकाल के लिये महिमामंडित करने वाला इस आशय की भ्रामक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई? क्या यह इस टीम की अनाधिकार चेष्टा नहीं हे? क्या ऐसे भ्रामक, अमर्यादित, अवांछित एवं अशोभनीय कृत्य के लिये जिम्मेदार व्यक्ति को चिन्ह्ति कर उसके विरूद्ध कार्रर्वाइ सुनिश्चित नहीं की जानी चाहिये?

इस प्रेस विज्ञप्ति में सेवानिवृत मुख्य सचिव के महिमामंडन के लिये मंत्रिपरिषद की ओर से विगत 35 वर्ष की सेवा में (केवल मुख्य सचिव के कार्यकाल की अवधि में नहीं) उनके लिये ‘‘कुशल, दक्ष, सराहनीय, उत्कृष्ट, निष्ठापूर्व क आदि जिन शब्दों का इस्तेमाल मुख्यमंत्री सचिवालय की प्रचार टीम ने किया है उनके अर्थ और भाव से तथा इस प्रसंग में मंत्रिपरिषद की गरिमा से इस प्रचार टीम संभवतः अवगत नहीं है। एक विवादास्पद अधिकारी के प्रति अपने उपकृत मनोभाव को प्रदर्शित करने के लिये इस टीम द्वारा मंत्रिपरिषद के मुंह से ऐसी शब्दावली अभिव्यक्त करवाना घोर आपत्तिजनक है। यह मंत्रिपरिषद की मर्यादा के प्रतिकूल है। इसके लिये टीम के जिम्मेदार पदाधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिये। भविष्य में मंत्रिपरिषद बैठकों की कार्यवाही के बारे में प्रेस विज्ञप्ति जारी करते समय पर्याप्त सावधानी बरतने की चेतावनी भी इस अथवा ऐसी किसी प्रचार टीम को दी जानी चाहिये। इनके 35 वर्षों के सेवाकाल में गुण-दोष का मूल्यांकन दिये बिना इसकी सराहना करने और इसके प्रति आभार व्यक्त करने संबंधी प्रेस विज्ञप्ति जारी करना, वह भी मंत्रिपरिषद की ओर से, घोर आपत्तिजनक है, अवांछित है। ऐसा करने वालों को शायद मंत्रिपरिषद की गरिमा का ख्याल नहीं है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा है कि जिस अधिकारी का सेवा कार्यकाल अप्रत्याशित रूप से विवादास्पद रहा है, जिसके प्रशासनिक आचरण में संवेदनशीलता का अभाव रहा है, जिसके विरूद्ध नियम-कानून की दंडनीय अवहेलना जानबूझकर करने का पुष्ट प्रमाण है, एकीकृत बिहार के समय भ्रष्ट एवं घोटाला के आरोपी शीर्ष पदधारी राजनीतिज्ञों के प्रति जिसका समर्पण भाव जगजाहिर है, जिसने पशुपालन घोटाला के विरूद्ध आंदोलनरत भाजपा कार्यकर्ताओं को उस समय प्रताड़ित किया है, जिसने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बावजूद पशुपालन घोटाला के मुख्य अभियुक्त की गिरफ्तारी में बाधा डाला है जिसके कारण सीबीआई को सेना से मदद की गुहार करनी पड़ी, घोटाला के मुख्य अभियुक्त को गिरफ्तार कर पटना के बेउर जेल भेज दिया गया तो जिसने संवैधानिक एवं प्रशासनिक मर्यादा की अवहेलना कर अभियुक्त की सहानुभूति में बेउर जेल गेट पर करूण कंदन किया, चुनाव आयोग ने गया में जिलाधिकारी के रूप में जिसके आचरण के विरूद्ध सख्त टिप्पणी की है एवं जिसे भविष्य में चुनाव कार्य में भाग लेने से मना किया है, मुख्य सचिव रहते जिसने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश एवं भारत सरकार के निर्देश के उलट प्रशासनिक निर्देश जारी किया है जिस कारण हजारों लाभुकों का राशन कार्ड रद्द हो गया कल्याण मंत्री की अवहेलना कर जिसने संचिका पर मनमाना आदेश दिया है जिसका जिक्र गत सितंबर में राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष होने पर मंत्री ने यह आदेश रद्द किया, पथों के चौड़ीकरण (विशेषकर गुआ-सर्लाइ-पथ का चौड़ीकरण) के लिये जिसने फर्जी सर्वेक्षण पर मुहर लगाया है और संबंधित नियम-कानून की अनदेखी किया है, नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने जिसके विरूद्ध ‘इरादों में ईमानदार नहीं होने’ की टिप्पणी की है और कहा है कि संवेदक भी इस बेईमानी का हिस्सा है, जिसके कार्यकाल में कार्य विभागों के ठेकों को मैनेज करने के दंडित किये जाने योग्य आरोपी अभियंताओं-अफसरो को प्रश्रय मिला है एवं लोकनिधि का अपव्यय करनेवाली माफियानुमा कार्यसंस्कृति को बढ़ावा मिला है, ऊपर से लेकर नीचे तक का प्रशासनिक ढांचा चरमरा गया है, पुलिस और प्रशासन का शीर्षस्तर खेमेबाजी का शिकार हो गया है, प्रशासन का डिलीवरी सिस्टम पंगु हो गया है।

वैसे अधिकारी की सेवानिवृति पर उसके प्रति उपर्युक्त शब्दों में मंत्रिपरिषद द्वारा उसके संपूर्ण कार्यकाल के लिये सराहना करने एवं आभार प्रदर्शित करने का समाचार प्रकाशित होने से जनमानस में मंत्रिपरिषद की छवि धूमिल हुई है। ऐसा करने वाले और उन्हें ऐसा करने का आदेश देने वाले निश्चित रूप से दंड के भागी हैं।

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