संतोषी मरी नहीं मारी गई

संतोषी कुमारी भूख से नहीं मलेरिया से मरी है, उसे भूख ने नहीं मच्छर ने मारा है। पूरा प्रशासनिक अमला यही साबित करने पर अमादा है। इस सिस्टम की बेरुखी देखिए कि जब संतोषी जिंदा थी उसे जीने न दिया और जब वह मरी तो उसके मरने पर ही सवाल खड़ा कर दिया। इस सिस्टम की बेशर्मी देखिए कि जब उसका पूरा परिवार अनाज के लिए दर -दर की ठोकरें खा रहा था तो उनकी एक न सुनी। पर जब उस परिवार की बिटिया ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ा तो सीधा उसके दरवाजे तक पहुंच गयी और फौरन झूठी रिपोर्ट बना दी।

याद करिए अभी पिछले महीने ही रघुवर सरकार ने 1000 दिन की उपलब्धियां खूब ताम-झाम से ढोल नगाड़े बजा कर गिनाई है। मुख्यमंत्री जी ने भी खूब दिल खोलकर जनता के सामने योजनाओं की नुमाइश की। झारखण्ड को नंबर वन राज्य बनाने का सपना दिखाया। जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपए उस जश्न के भेंट चढ़ गए। पर सरकार जब यह जश्न मना रही थी ठीक उसी समय संतोषी का पूरा परिवार अनाज के लिए इधर-उधर भटक रहा था। अधिकारियों से मदद की गुहार लगा रहा था। लेकिन आधार कार्ड के बहाने इस गरीब आदिवासी परिवार को सिस्टम में मौजूद सरकारी रहनुमा खून के आंसू रुला रहे थे।

अब जब यह पूरा मामला सामने आया है तो पूरी रघुवर सरकार के साथ ही नौकरशाही के गलियारे में मातमी खामोशी पसरी हुई है। कोई बोलने वाला नहीं। सारे बहाने बना रहे हैं। सिस्टम कि यह सुनियोजित चाल है कि किसी भी प्रकार से उस मासूम की मौत को बीमारी की झूठी मिट्टी के अंदर दफ्न कर दिया जाए। पर देखा जाए तो बीमार संतोषी नहीं थी। बीमार तो यह सरकारी सिस्टम है। जिसका सारा अंग फेल हो चुका है। सड़ चुका है। और यदि सड़ चुका है तो सर्जिकल स्ट्राइक की दंभ भरने वाले सत्तासीन दल के मुखिया को चाहिए कि वह उसकी सर्जरी करें। उसे काट कर अलग करें। अन्यथा उपलब्धियों बोझ जनता को इतनी भारी पड़ने लगेगी कि उसे कंधे पर लेकर चलना मुश्किल हो जाएगा।

यह समझना जरुरी है कि गरीबों के पास सिवाय पेट के कोई समस्या नहीं है। मोमेंटम झारखंड से हो सकता है कि कुछ वर्ष बाद राज्य की छवि निखरे पर भूख से तड़प कर अगर 11 साल की बेटी संतोषी की मौत होती है। तो यह झारखंड के माथे पर कलंक है। जो राज्य के मुखिया को सिहरने के लिए काफी है। जिससे किसी और संतोषी की जिंदगी के साथ सिस्टम फिर ये भद्दा मजाक नहीं करे।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *