राजनीति शर्मसार…झारखंड कलंकित…

भात-भात कहते, भूखी मर गयी संतोषी

 

रघुवर राज में अबतक भूख से मर चुके आधा दर्जन लोग

सरयू राय ने कहा, मुख्य सचिव ने दिए थे राशन कार्ड खत्म करने के आदेश

राघवेन्द्र

ये कैसी राजनीति है ! जहां राज्य सरकार 1000 दिनों की सफलता पर इतरा रही है | जहां मुख्यमंत्री घूम-घूम कर विदेशों में अपनी छवि चमका रहे हैं, और इधर उनकी नाक के नीचे सिमडेगा के कारीमाटी में 10 साल की संतोषी नायक भात- भात कहते भूख से मर गयी . इसके परिवार का राशन कार्ड सरकार ने निरस्त कर दिया था. सात महीने से संतोषी के परिजनों को एक छटांक राशन नहीं मिला था | सात महीने से संतोषी की माँ कोयली देवी लगातार हाकिमों के यहां राशन कार्ड के लिए दौड़ रही थी, तब सिमडेगा के डीसी की कान पर जूं नहीं रेंगी और जब भूख से हुई मौत पर कोहराम मचा तो डीसी मंजुनाथ भजन्त्री ने आनन फानन गांव का दौरा भी कर लिया और एक झोलाछाप डॉक्टर से बात करके एलान भी कर दिया कि संतोषी भूख से नहीं मरी, मलेरिया से मरी है | रघुवर सरकार डीसी की रिपोर्ट को सच मानकर यही बात कह देगी और राजनीति की आत्मा कराह कर रह जाएगी |

पर राजनीति के सुविधावादी खेल में इसबार मंत्री सरयू राय ने सवाल खड़ा कर दिया है | सरयू राय ने कैबिनेट में सवाल पूछा कि आखिर संतोषी के परिजनों का राशन कार्ड क्यों और किसके कहने पर निरस्त किया गया|  मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आधार या किसी और कार्ड की वज़ह से किसी का राशन बंद नहीं किया जा सकता तो मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने कैसे झारखंड के कई लाख राशन कार्ड निरस्त करा दिए| इस सवाल पर अब मुख्य सचिव घिर रही हैं |  1000 दिन पुरे होने पर राज्य सरकार ने सार्वजनिक घोषणा की थी कि लाखों लोगों के राशन कार्ड निरस्त कर दिए गए हैं |

झारखंड में भूख से मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है | 1000 दिनों में झारखंड में आधा दर्जन लोग, जिसमे कई किसान भी थे की भूख या कर्ज के चलते जान चली गयी | असम्वेदनशील सरकार ने किसी भी मौत की नोटिस नहीं ली | राजनीति का स्तर कितना गिर गया है, इसकी एक और बानगी देखिये|  पूर्व नक्सली और भाजपा नेता मंगल नगेशिया के श्राद्ध का भोज खाने मुख्यमंत्री सिमडेगा के बीरू बुढा गए लेकिन कुछ ही दूर में उस परिवार की सिसकी सुनने का भी वक़्त नहीं मिला विकासपुरुष रघुवर दास को| झारखंड की एक होनहार बेटी तड़प-तड़प कर मर गयी लेकिन मुख्यमंत्री के अमले ने वहां जाने- झाँकने की जहमत भी नहीं उठायी |

अब सवाल संतोषी पर ही उठाया जायेगा | सरकार भूख को गलत ठहराने में जुट जाएगी, क्योंकि इससे विकासपुरुष की छवि को धक्का लगेगा | सरकारें अधिकारियों के सनक से चलती हैं | और अधिकारी जानते हैं कि भूख से मौत अगर सच साबित हुई तो मुख्य सचिव से लेकर डीसी तक को सुप्रीम कोर्ट जेल भेज देगा | इसलिए पूरा शासनतंत्र मुखिया से लेकर परिजनों तक को चुप कराने में लग गया है |

 

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