बालू बंदी बिगाड़ सकती है खेल

बिहार में बालू गिट्टी संकट की वजह से अर्थव्यवस्था, कानून व्यवस्था और राजव्यवस्था तीनों बेपटरी हो रही है. एक तरफ हाई कोर्ट ने सचिव पर अवमानना का मामला चलाने का आदेश देकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है, दूसरी तरफ बालू संकट से उपजे हाहाकार की वजह से प्रदेश में जगह-जगह पर कानून व्यवस्था का सवाल पैदा हो रहा है. अपनी राजनीतिक हठधर्मिता की वजह से सरकार अटकी हुई है, जिसका फायदा राजद को मिल रहा है. आखिर ऐसा क्यों हो रहा है! इसे समझना जरूरी है.

राजद के वोट बैंक और बालू कारोबार को एक समझने की राजनीतिक समझ की वजह से ऐसी स्थिति बनी है. वरिष्ठ राजद नेता रामबदन राय कहते हैं कि एनडीए सरकार को लगा कि प्रदेश के बालू कारोबार पर यादवों का कब्जा है, इसलिए नीतीश सरकार ने यादवों को आइसोलेट करने के चक्कर में एक तरह से बालू बंदी ही कर डाली. इससे पूरे प्रदेश में कोहराम मचा हुआ है, जो नौजवान ट्रांसपोर्टर बैंक से कर्ज लेकर ट्रैक्टर और ट्रक से बालू ढोते थे, वह आज बेरोजगार हैं. जो राजमिस्त्री थे, वह घरों के नहीं बनने से बेकार बैठे हैं. मजदूर बेकार हैं. बालू नहीं मिल रही है तो सीमेंट कारोबारी बेकार हैं. कुल मिलाकर बिहार की पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था बेपटरी हो गई है. राम बदन राय कहते हैं, बालू के छोटे कारोबारी को बालू माफिया कहना सरकार की विकृत मानसिकता को दर्शाता है. इधर हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश का उल्लंघन किए जाने पर विभाग के सचिव के के पाठक पर अवमानना का मामला चलाने की बात की, तो क्यों हो रही है हाईकोर्ट की अवमानना!

विभाग के अफसर ऐसा क्यों कर रहे हैं! इस संबंध में युवा राजद नेता फरजान अहमद कहते हैं कि सरकार के अफसर बेलगाम हैं, वह किसी की नहीं सुनते, उन्हें जनता से कोई लेना-देना नहीं है. पूरा बिहार बालू-बालू कर रहा है और सरकार के अफसर समस्या को निपटाने की वजह जटिल बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

जदयू नेता सुजीत यादव सरकार पर लग रहे आरोपों से इत्तेफाक नहीं रखते, वह कहते हैं कि बालू का कृत्रिम संकट पैदा किया जा रहा है. बालू उपलब्ध है और सरकार रास्ता निकालने में जुटी है. खैर इतना तो तय है इस बालू पॉलिटिक्स में राजद ने बाजी मार ली है. लोगों के आक्रोश को देखते हुए राजद ने 21 को बंदी का आह्वान किया है, जिसे व्यापक समर्थन मिलता दिख रहा है. इस संबंध में सीमांचल के युवा राजद नेता नन्हा मुश्ताक कहते हैं कि राज्य सरकार अपनी हठधर्मिता छोड़कर बालू को सर्व सुलभ बनाए ताकि बिहार का ठहरा विकास पुनः चल पड़े.

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