अर्जुन मुंडा की ना के बाद समीर उरांव आ गए रेस में

राज्यसभा चुनाव को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का नाम आखिरी क्षणों में छटा. बताया जाता है कि अर्जुन मुंडा ने राज्य की राजनीति में ही रहने का फैसला किया. उसके बाद भाजपा ने RSS के पसंदीदा डॉक्टर समीर उरांव पर दांव खेलने का फैसला किया. समीर उरांव की छवि बेदाग और बहुत मिलनसार की रही है. वह जमीन से जुड़े कार्यकर्ता रहे हैं. कभी भी किसी भी विवाद से उनका लेना-देना नहीं रहा. इसी बात ने संघ और भाजपा को उनके नाम पर सोचने के लिए तैयार किया. समीर उराव का नाम आगे कर भाजपा ने नाराज आदिवासियों को मनाने की कोशिश भी की है. पत्थर गढ़ी, सीएनटी, एसपीटी और कुर्मी तथा तेली आरक्षण को लेकर भाजपा की एंटी आदिवासी छवि बन रही थी. पार्टी ने समीर उरांव के दांव से सभी को धोने की कोशिश भी की है.

झारखंड की राजनीति के जानकार बताते हैं कि अर्जुन मुंडा को जल्द ही संगठन में महत्वपूर्ण स्थान मिल सकता है. गुजरात और उत्तर पूर्व चुनाव में बेहतर नतीजे दिला कर पार्टी की नजर में वह अपनी जगह बना चुके हैं. उनका बनवास भी काफी लंबा खिंच चुका है. ऐसे में पार्टी सूत्र बताते हैं कि अर्जुन मुंडा का राजनीतिक वनवास अब जल्दी खत्म होने वाला है. राज्यसभा चुनाव के बाद प्रदेश की राजनीति में कुछ बदलाव की संभावना बन रही है. ऐसे में उम्मीद है कि बनवासी अर्जुन राजपथ पर सरपट तीर चलाते दिखें.

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