संघ की नजर में कोई दुश्मन नहीं: इंद्रेश कुमार

आज भारत में हर जगह मजहबी, धार्मिक आदमी मिल जाते हैं, लेकिन मजहबी सिद्धांतों की ठीक से नहीं समझ पाने के कारण लोग कट्टरता की ओर झुक जाते हैं। हमने देश के लिए कुर्बानी देने को संकल्प लिया है और बदले में लेने का कुछ भी इरादा नहीं। देने में इबादत है, कुर्बानी है और लेने में व्यापार है, स्वार्थ है। ये बातें आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य व हिन्दू जागरण मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने आज हिन्दू जागरण मंच द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में कही।
आरएसएस के स्थापना काल से ही देश ही नहीं, पूरे विश्व में कोई भी जाति, धर्म, मजहब, पन्थ सम्प्रदाय के लोग कभी कोई संघ के लिये दुश्मन रहे ही नहीं हैं। अगर हम ऐसा मानते हैं तो दूसरों से भी यही अपेक्षा रखते हैं तभी तो भारत एक बनेगा, श्रेष्ठ बनेगा। हमने कभी किसी को दुश्मन के नजरिए से नहीं देखा और इतिहास व वर्तमान इस कठोर सच का साक्षी है। वसुधैव कुटुम्बकम हमारी मूल धारणा रही है, पूरा विश्व हमारा परिवार है। इसी मौलिक सोच के साथ हम कार्य करते हैं। भेदभाव रहित समाज की स्थापना हमारा उद्देश्य है। उन्होंने आगे कहा, हम सभी भारतीयों के पूर्वज एक ही हैं व भारत में निवास करने वाले सभी हिन्दू ही हैं। भारत की सुरक्षा इसकी सामाजिक एकता पर निर्भर है, इसी एकत्त्व की भावना से ही देश सुरक्षित रहेगा। इसके लिए सभी देशवासी अपने मतभेदों को भुलाकर, देश को पुनः विश्व गुरु बनाने व परम् वैभव तक ले जाने के पवित्र उद्देश्य में हम सभी जुट जाएं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के उद्देश्यों से कार्य करता है। हमारा कोई निजी उद्देश्य नहीं है अपितु देशहित ही सर्वपरि है। भारत मे निवास करने वाले सभी लोग भारतीय बनें,भारतीयता को अंगीकार करें और भारत से प्यार करें यही विचारों से समाज को संगठित करने की जरूरत है। इसी में राष्ट्र की सुरक्षा निहित है।
हिन्दू साम्प्रदायिकता का नहीं बल्कि मानवीयता का सूचक है। हिन्दू से बढ़कर कोई दूसरा धर्मनिरपेक्ष धर्म दुनिया में नहीं है। हिन्दू धर्म में विश्व कल्याण के बीज निहित हैं। दुनिया के सभी संकटों को समाधान भी हमारे धर्म में ही है। सभी को सनातन हिन्दू धर्म दर्शन व जीवन पद्धति की ओर लौटने के लिए अपील करते हुए इंद्रेश कुमार ने कहा, ये कोई नारा नहीं बल्कि ऐतिहासिक प्रामाणिक सच है। अगर मानवता का सच्चे अर्थों में संरक्षण करना है, मानव सभ्यता को बचाना है, तो फिर हिन्दू धर्म दर्शन, जीवन पद्धति से ही ये संभव है। इसके पीछे ऐतिहासिक कारण हैं। सभी लोगों को विश्व के सभी धर्मों का इतिहास पढ़ना चाहिए। आज तक के धर्मों के इतिहास में शांति, सहिष्णुता,अहिंसा व धर्मनितपेक्षता का वास्तविक परिचय सिर्फ हमने दिया है। आज या कल पूरे विश्व समुदाय को इस कठोर सच को स्वीकार करना ही होगा। किसी का नुकसान व अपमान हम भारतीयों का कभी संस्कार नहीं रहा है और इस सिद्धांत को हमने व हमारे पूर्वजों ने सच करके दिखाया है। संघ भी इसी पथ पर हमेशा चलता है। देश को मौन समर्पित सेवा देना ही हमारा धेय है। समरस समाज का निर्माण संघ का उद्देश्य है। एशिया से लेकर यूरोप और अफ्रीका से लेकर अमेरिका विश्व के हर कोने में शांति के फूल खिलाने के लिए, आज सनातन हिन्दू धर्म दर्शन चिंतन व यहां की जीवन शैली सबसे बड़ी भूमिका निभा सकता है। इसपर विश्व समुदाय विचार करे।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *