जनेऊधारी, जटाधारी और मैं

गुजरात चुनाव में भाजपा ने राहुल गांधी को जनेऊ धारी ब्राह्मण बना दिया. शायद देश के बहुत सारे नौजवानों को यह नहीं पता था. कांग्रेस के भावी अध्यक्ष को जनेऊ धारी बनाने के लिए सबसे पहले मैं, एक गुजराती वोटर जटाधारी नेताओं को बहुत-बहुत प्रणाम करता हूं.

गुजरात चुनाव ने किस्सागोई के सारे मापदंड ध्वस्त कर दिए हैं. हर रोज नए किस्से, कभी मंदिर के किस्से, कभी युवा नेता के CD के किस्से, कभी भूकंप के किस्से, भरमार है ऐसे किस्सों की. लेकिन गुजरात के वोटर इन किस्सों के फेरे में नहीं है. वह तो साल-दर-साल ऐसे किस्से सुनते आया है.

गुजरात में सवाल सत्ता में भागीदारी का है. 2 दशकों से अधिक समय से सत्ता में रहने की वजह से पैदा हुए अहंकार का है. आम गुजराती मतदाता अहंकार से भरे प्रवचन सुन रहा है. गुन रहा है. वह चुप है लेकिन उसकी ख़ामोशी बहुत कुछ कह रही है. भाजपा भी इसी खामोशी से परेशान है. तमाम मीडिया मैनेजमेंट के जरिए डेढ़ सौ सीट पर जीतने का दावा करने वाली भाजपा भीतर से कहीं डरी दिखती है. यह डर ही तो है कि पूरी केंद्र सरकार और आधा दर्जन मुख्यमंत्री गुजरात में गली-गली वोटाटन कर रहे हैं. यह जीते हुए पार्टी का आत्मविश्वास नहीं है. ऐसा क्यों है! यह आप सब को समझना है.

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