विशेष राज्य की मांग पर स्थिति स्पष्ट करे NDA: RJD

राजद के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने बीजेपी, जदयू सहित एनडीए के सभी घटक दलों से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने संबंधी मांग पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। राजद नेता ने कहा है कि राजद, वर्ष 2000 में बिहार के बंटवारे के समय से ही बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करता रहा है। तत्कालीन केन्द्र की एनडीए सरकार द्वारा उस समय उत्तराखंड को तो विशेष राज्य का दर्जा दे दिया गया पर बिहार की मांग को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जबकि राज्य की तत्कालीन राजद सरकार द्वारा 25 अप्रैल, 2000 को बिहार विधानसभा से सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भेजा गया था।

राजद नेता ने कहा कि 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समक्ष बिहार की तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग दुहराई गई। पीएम वाजपेयी ने अपने भाषण में सीएम राबड़ी की मांग पर सहमति व्यक्त करते हुए बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने का आश्वासन भी दिया था। पुनः 02 अप्रैल, 2002 को बिहार विधानसभा द्वारा सर्वसम्मत प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया। 16 मई, 2002 को राजद के नोटिस पर लोकसभा में नियम 193 के तहत हुई चर्चा में सभी दलों के सांसदों द्वारा बिहार का पक्ष लिया गया। पर केन्द्र की तत्कालीन एनडीए सरकार ने बिहार की मांग को इसलिए ठंडे बस्ते में डाल दिया क्योंकि बिहार में राजद की सरकार थी।

उन्होंने कहा है कि आज जब केन्द्र और राज्य दोनों जगह एनडीए की सरकार है तो बिहार को विशेष राज्य का दर्जा क्यों नहीं दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी गत विधानसभा चुनाव के दौरान बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने का आश्वासन दिया गया था।

राजद नेता ने बीजेपी सहित एनडीए के सभी घटक दलों से बिहार की इस मांग को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन दलों को स्पष्ट करना होगा कि वे बिहार का विकास चाहते हैं या बिहार के कीमत पर सत्तासुख प्राप्त करना चाहते हैं। यदि बिहार हित की चिंता है तो उन्हें चन्द्रबाबू नायडू का अनुसरण करना चाहिए। अन्यथा समय आने पर बिहार की जनता उनके घड़ियाली आंसू का जवाब देगी।

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