बिहार में दो साल पहले चुनाव में जाने को तैयारः केसी त्यागी

जदयू बिहार में समय से पूर्व चुनाव कराए जाने की पक्षधर है, और तय समय-सीमा से दो साल पहले इस साल के आखिर में दिसंबर तक राज्य में विधान सभा चुनाव कराने को तैयार है। जानकारी के अनुसार पार्टी के महासचिव के सी त्यागी ने कहा है कि जदयू पीएम मोदी के उस विचार को मानती है कि देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होने चाहिए इससे कई सारी समस्याओं का पटाक्षेप हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि जदयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी पीएम के इस सोच को अमल में लाने पर अपनी सहमति जतायी है। केसी त्यागी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लगता है कि इससे न केवल देश में चुनावी माहौल के वातावरण में कमी आएगी बल्कि इससे चुनी हुई सरकारों को काम करने का अधिकतम वक्त मिल सकेगा।

समय से पूर्व चुनाव में जाने के सवाल के जवाब में त्यागी ने कहा कि इस साल नवंबर-दिसंबर में तीन बड़े राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनके अलावा तीन बड़े राज्य तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा विधान सभा का कार्यकाल साल 2019 में लोकसभा के कार्यकाल के साथ पूरा हो रहा है। ये सभी चुनाव 2018 दिसंबर में एक साथ कराए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो हम भी विधानसभा के बचे दो साल के कार्यकाल से पहले ही चुनाव में जाना पसंद करेंगे।

गौरतलब है कि बिहार विधान सभा का चुनाव 2015 में अक्टूबर-नवंबर में हुआ था। तब नीतीश कुमार की पार्टी जदयू, लालू यादव की पार्टी राजद और कांग्रेस ने मिलकर महागठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा था। इस गठबंधन को 243 सदस्यों वाले विधान सभा में कुल 178 सीटें मिली थीं। इनमें से सबसे ज्यादा लालू यादव की पार्टी राजद को 80, नीतीश की जदयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटें मिली थीं। बीजेपी को 53 सीटें और उनके सहयोगी दलों को पांच सीटें मिली थीं। नवंबर 2015 में महागठबंधन की सरकार में नीतीश कुमार ने फिर से राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली लेकिन करीब 20 महीने बाद यह महागठबंधन टूट गया। नीतीश कुमार ने जुलाई 2017 में फिर बीजेपी के सहयोग से राज्य में सरकार बना ली। फिलहाल जदयू बीजेपी की सहयोगी पार्टी है और एनडीए का सदस्य है।

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