कैबिनेट का बहिष्कार किया था लालचंद महतो ने

बूलाल मरांडी झारखण्ड के पहले मुख्यमंत्री थे। झारखण्ड में नयी आरक्षण नीति पर फैसला होना था। पिछड़ों के आरक्षण के सवाल पर कई दिनों से चिक-चिक हो रही थी। कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा के नेतृत्व वाली कैबिनेट उप समिति ने 73 फीसदी आरक्षण की अपनी सिफारिश भेज दी थी। इस कमेटी में अर्जुन मुंडा के अलावा तत्कालीन उद्योग मंत्री पीएन सिंह, तत्कालीन ऊर्जा मंत्री लालचंद महतो, तत्कालीन जल संसाधन मंत्री रामचंद्र केसरी, तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री सुदेश महतो और तत्कालीन विधि मंत्री रामजी लाल सारडा सदस्य थे। 18 मई 2001 को गठित हुई इस कमेटी की अगली बैठक 23 मई 2001 को हुई, जिसमें स्टीफन मरांडी, फुरकान अंसारी, गिरिनाथ सिंह, महेंद्र सिंह, भुवनेश्वर मेहता और अरूप चटर्जी जैसे विरोधी दल के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया था। 7 जून को इस कमेटी की आखिरी बैठक हुई।

16 जून 2001 को आयोजित कैबिनेट में इस उप समिति ने अपनी सिफारिशें रख दी। जिसमें राज्य की सरकारी नौकरियों में 73 फीसदी आरक्षण की सिफारिश की गयी। जिसमें एसटी के लिए 32 प्रतिशत, एससी के लिए 14 प्रतिशत और पिछड़ों के लिए 27 फीसदी आरक्षण की सिफारिश की गयी।
इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को सीधे तौर पर तो नहीं माना लेकिन 50 प्रतिशत से ऊपर के 23 प्रतिशत वाले स्लैब को एडहोक स्तर पर लागू करने की छूट राज्य सरकार को दे दी थी। लेकिन तत्कालीन सरकार की ओर से 23 प्रतिशत वाले मामले को छुपा लिया गया था। पिछड़े वर्ग से आनेवाले तब के मंत्रियों को यही बताया गया था कि 50 प्रतिशत से ऊपर का आरक्षण स्लैब संभव नहीं है।

लालचंद महतो बताते हैं कि ऐसे में तत्कालीन मुख्यमंत्री अनुसूचित जन जाति के लिए प्रस्तावित 32 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के लिए प्रस्तावित 10 प्रतिशत के बाद पिछड़ों को मात्र 8 प्रतिशत आरक्षण देना चाहते थे ,जिसका पिछड़े वर्ग से आनेवाले मंत्रियों ने मुखर विरोध किया। 8 प्रतिशत आरक्षण की सूचना मिलते ही होटल अशोक में ऐसे मंत्रियों ने मुख्यमंत्री के विरोध में बैठक की। तत्कालीन ऊर्जा मंत्री लालचंद महतो ने इस बैठक की अध्यक्षता की। जिसमें तय किया गया कि पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के सवाल पर आर-पार की लड़ाई होगी।

अगले दिन कैबिनेट से पहले मुख्यमंत्री से इन मंत्रियों ने पिछड़ों के आरक्षण पर बात की। 8 प्रतिशत से बढ़ते- बढ़ते पहले 9, 10, 11, 12, 13 के बाद 14 प्रतिशत पर मुख्यमंत्री अड़ गए। जब लालचंद, मधु सिंह और रामचंद्र केसरी जैसे मंत्रियों ने इससे असंतुष्टि जाहिर की तो इन्हें कहा गया कि फिर कैबिनेट में वोटिंग करा ली जाये। लालचंद महतो को पता था कि बीजेपी कोटे के मंत्री इस विषय पर साथ नहीं देंगे और वे लोग हार जायेंगे। ऐसे में पिछड़ों के आरक्षण के सवाल पर लालचंद महतो, मधु सिंह और रामचंद्र केसरी जैसे अन्य मंत्रियों ने कैबिनेट का बहिष्कार किया। इसे दूसरे दिन सभी अखबारों ने प्रमुखता से छापा भी।

अभी पिछड़ा वर्ग आरक्षण मोर्चा के अध्यक्ष के तौर पर लालचंद महतो इस बड़े समाज की राजनीतिक अनदेखी को लगातार मुद्दा बना रहे हैं। वो पूरे प्रदेश में पिछड़ों का सवाल उठा रहे हैं, जिसे स्वीकार्यता भी मिल रही है। वो कहते हैं आगामी 18 फरवरी को संथालपरगना के धार्मिक केंद्र बासुकीनाथ में बड़ी रैली होगी। इसके बाद रांची में विधानसभा मैदान में मोर्चा के यूथ विंग की बड़ी रैली होगी। जिसमें जिला और राज्य स्तर पर सरकारी नौकरियों में पिछड़ों की अनदेखी का सवाल उठाया जायेगा।
साभार राजनीति गुरु पत्रिका

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