अब भी बोल रहा है राजबाला का जादू…

ऐसे तो राजबाला वर्मा झारखण्ड की मुख्य सचिव पद से रिटायर हो चुकी हैं, लेकिन अभी भी सरकार पर उनका जादू सर चढ़ कर बोल रहा है. मंगलवार की कैबिनेट में प्रमुख अजेंडे के बाद अन्यान्य में कहा गया कि राजबाला वर्मा काफी कुशल प्रशासक थी, योग्य थी वगैरह-वगैरह. उनके उज्जवल भविष्य की मंगलकामना तक कर दी गयी. कैबिनेट के फैसलों के बारे में मीडिया को ब्रीफ करते हुए एसकेजी रहाटे ने इसका उल्लेख भी कर दिया, बस इसी से राजनीतिक बबाल शुरू हो गया.

मंत्री सरयू राय और सीपी सिंह ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था कैबिनेट में. सरयू राय ने तो कह दिया कि राजबाला वर्मा ने ऐसा कुछ भी नहीं किया, जिसके लिए उनकी तारीफ़ की जाये. एक और मंत्री अमर बाउरी ने भी कह दिया कि तारीफ जैसा कुछ नहीं था, यह केवल औपचारिकता थी, इससे पहले भी जो मुख्य सचिव हटते या रिटायर होते हैं, उन्हें विदाई के दो शब्द कहने का रिवाज़ है.

तो आखिर ऐसा क्या है राजबाला वर्मा के नाम में कि उनका नाम सुनते ही अधिकांश राजनेता नाक- भौं सिकोड़ने लगते हैं. और ऐसा क्या है कि मुख्यमंत्री किसी की आलोचना सुने बगैर मैडम की तारीफ़ करने का एक भी मौका नहीं छोड़ते. सत्ता सूत्र बताते हैं कि अभी भी हुकूमत में राजबाला वर्मा की खूब सुनी जा रही है. वो आधिकारिक तौर पर भले ही सरकार में नहीं हैं, लेकिन आज भी वही प्रदेश की नौकरशाही में हो रहा है, जो वो चाहती है.

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