…तो 14 साल से मौन क्यों थीं मैडम !

मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने चारा घोटाला मामले में सरकार द्वारा भेजे गए नोटिस का जवाब सौंप दिया है। जानकारी के अनुसार सीएस ने कहा है कि कोषागार से हुई फर्जी निकासी के लिए कोषागार का पदाधिकारी जिम्मेवार है। उन्होंने यह भी कहा है कि चाईबासा में डीसी के रूप में काम करते हुए कोषागार से किसी प्रकार की फर्जी निकासी हो रही है इस तरह की न तो कोई सूचना थी और न ही इसका आभास ही था। कोषागार से संबंधित मामलों की निगरानी सीधे-सीधे उपायुक्त द्वारा नहीं की जाती है।

सीएस ने अंततः नोटिस का जवाब तो दिया लेकिन उनके जवाब पर अब और भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि अगर बात इतनी सी ही थी तो फिर पिछले 14 सालों से भेजे जा रहे रिमाइंडर का जवाब क्यों नहीं दिया? वहीं सीबीआई ने भी तो यही मामला उठाया है कि तत्कालीन डीसी ने अपने कार्य में लापरवाही बरती है।

उधर, सीएस के जवाब पर नया विवाद खड़ा हो गया है कि फिर अन्य अधिकारियों पर ऐसे ही मामले में कैसे केस दर्ज हुए? उनको फिर किस आधार पर जेल हो गया? ऐसे ही मामले में सीनियर आइएएस अधिकारी सुखदेव सिंह पर भी आरोप लग चुका है।

ध्यान रहे कि राज्य के पूर्व सीएस सजल चक्रवर्ती और ए के बसु के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। सजल के खिलाफ आरोप था कि चाईबासा के डीसी रहते हुए इन्होंने कोषागार पर कोई नियंत्रण नहीं रखा। जिसके कारण बाद में उन्हें कारावास की सजा सुनाई गई।

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