राजा पीटर ने कराई थी रमेश सिंह मुंडा की हत्या!

रक्षक बना भक्षक : जिसपर थी सुरक्षा की जिम्मेवारी, उसी बॉडीगार्ड ने दी नक्सलियों को सूचना

राजनीति और अपराध की एक और हिंसक कथा का सच सबके सामने आया। इस खुलासे ने झारखंड के राजनीतिक गलियारे में सबकी नींद उड़ा दी है। एनआईए की जांच में यह खुलासा हुआ, जबकि रांची पुलिस ने इस हत्याकांड पर मिटटी डाल दी थी। अब यह सच सामने आ गया है कि पूर्व मंत्री राजा पीटर ने राजनीति की सीढ़ी चढ़ने के लिए रमेश सिंह मुंडा की हत्या कराई थी। यह हत्या कुंदन पाहन दस्ते के जरिये कराई गयी थी। यानि यह कोई नक्सली घटना नहीं, एक सुनियोजित मर्डर था, इसपर नक्सली रंग डालने की कोशिश की गयी थी। रविवार को राजा पीटर की गिरफ़्तारी के बाद यह सच सबके सामने आया।

इस हत्याकांड में रक्षक ही भक्षक बना। रमेश सिंह के अंगरक्षक शेषनाथ सिंह इस हत्याकांड का सूत्रधार बना। 9 जुलाई 2008 को हत्यावाले दिन उसी ने हमलावरों को टिप्स दिए। बताया कि रमेश सिंह मुंडा अभी यहां हैं, एक-एक पल की जानकारी हत्यारों के पास थी। इसलिए जब रमेश सिंह मुंडा की जघन्य हत्या हुई तो शेषनाथ सिंह खेरवार को खरोंच तक नहीं आयी। तब भी सवाल उठे थे, लेकिन पुलिस में स्वजातीय धर्म निभा। इस बीच शेषनाथ प्रमोट होकर धनबाद में एएसआई बन गए। फिलहाल धनबाद के भौंरा थाने के जमादार शेषनाथ को 15 दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

दरअसल रमेश सिंह मुंडा झारखंड के लोकप्रिय नेताओं में थे। मिलनसार रमेश को हराना तमाड़ विधानसभा में किसी के लिए भी मुश्किल था। इसलिए आपराधिक बैकग्राउंड वाले राजा पीटर ने कुंदन पाहन की मदद से उन्हें रास्ते से हटाने का ही फैसला कर लिया। इसे माओवादी हिंसा का नाम देकर जांच की दिशा बदलने की कोशिश की गयी, जबकि माओवादियों ने इसे अंजाम नहीं दिया। यह एक कॉन्ट्रैक्ट किलिंग थी, जिसे कुंदन पाहन ने पैसे के लिए किया, इसमें संगठन बेवज़ह बदनाम हुआ।

राजा पीटर झारखंड सरकार में आबकारी मंत्री रह चुके हैं। इनपर कई आपराधिक मामलों में पहले भी जांच चल रही थी। विधायक बनने के बाद इनमें से कई मामले बंद कर दिए गए। ऐसे में राजनेताओं को यह जरुर विचार करना चाहिए कि अपराधी अगर उनकी जमात में आकर बैठ जाएं तो वो दोषमुक्त नहीं हो जाते।

रमेश सिंह मुंडा के बेटे और भाजपा विधायक विकास मुंडा ने यह आरोप तब लगाया था जब कुंदन पाहन को हीरो की तरह पेश कर रही थी रांची पुलिस। कल हो सकता है कुंदन पाहन बरी होकर चुनाव लडे और जीत जाए। क्या तब उसके द्वारा किये गए हत्याओं को भुला दिया जायेगा। एनआईए क्या नये सिरे से कुंदन पाहन के हाई-प्रोफाइल मामले खंगालेगी।

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