अब राहुल गांधी हैं मेरे बॉसः सोनिया गांधी

कांग्रेस बिलकुल नए तेवर में दिखायी दे रही है। हाईकमान से लेकर पार्टी के सारे वरिष्ठ पदाधिकारी अपने जिम्मेवारियों को लेकर संजीदा दिखायी दे रहे हैं। कहा जा रहा है कि पार्टी की इस नई कार्यशैली में हुए बदलाव की पीछे खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हैं। वे खुद पार्टी को व्यापक स्तर पर बदलने की कमान थामे हुए हैं। मीडिया सेल से लेकर तकनीकी सेल तक हर बात को लेकर वे बैठक कर रहे हैं।

कांग्रेस के इस नए तेवर का एक झलक गुरुवार को देखने को मिला जब कांग्रेस की पूर्व अध्‍यक्ष एवं वरिष्‍‍ठ नेता सोनिया गांधी ने पार्टी की संसदीय दल की बैठक में राहुल गांधी को अपना बॉस बताया। उन्‍होंने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि 'अब राहुल गांधी मेरे बॉस हैं। नए बॉस के बारे में कोई शंका नहीं है। उम्‍मीद है आप सब मिलकर राहुल के साथ काम करेंगे'।

सोनिया गांधी ने बैठक में केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्‍होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने संवैधानिक संस्‍थाओं को कमजोर कर दिया है। सरकार ने संसद, सुप्रीम कोर्ट और मीडिया को कमजोर कर दिया। उन्‍होंने कहा कि 'कृषि और अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर सरकार के दावे गलत हैं। नई नौकरियां मिल नही रहीं, बल्कि पुरानी जा रही हैं।' उन्‍होंने कहा कि इन चार सालों में देश में निवेश काफी गिर गया है।

उल्‍लेखनीय है कि बुधवार को ही पार्टी की पुरानी परंपरा को पुनर्जीवित करते हुउ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने देशभर से आए अपने नेताओं के प्रतिनिधिमंडलों और कार्यकर्ताओं के साथ यहां अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) मुख्यालय में मुलाकात की थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी सुबह करीब 9 बज कर 15 मिनट पर यहां अकबर रोड स्थित पार्टी मुख्यलाय आए और दिल्ली, राजस्थान और चुनाव वाले कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों के कार्यकर्ताओं के साथ मुलाकात की।

पार्टी प्रमुख के साथ पहले से ही इन प्रतिनिधियों के मुलाकात का कार्यक्रम तय था। पूर्व में कांग्रेस अध्यक्ष तक आसानी से पहुंच का मुद्दा चर्चा का विषय रहा है। पिछले कई सालों से एआईसीसी में कांग्रेस प्रमुख का कार्यालय बंद रहा है। यह तब खुलता था जब पूर्व पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी कांग्रेस कार्यकारी समित (सीडब्लयूसी) की बैठक या पार्टी के स्थापना दिवस जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में यहां आती थीं। हाल ही में कार्यालय की सफाई की गयी थी और वहां राहुल गांधी के बैठने के लिए प्रबंध किया गया। पूर्व में इंदिरा गांधी जैसी नेता वहां जनता दरबार में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मुलाकात करती थीं।

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