राजद के अंदर लोकतंत्र है ही नहीं, सभी पद पहले से तय : रघुवंश

राजद उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने एक बार फिर पार्टी के अंदर लोकतंत्र नहीं रहने की बात कह कर लालू प्रसाद की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राबड़ी की अध्यक्षता में हुई विधानमंडल की बैठक के एक दिन बाद रघुवंश प्रसाद का पार्टी लाइन से बाहर जाकर दिए गए बयान से उनकी नाराजगी साफ झलक रही है। अपनी ही पार्टी के चुनावी प्रक्रिया को सवालों के दायरे में खड़ा करने वाले रघुवंश 2013 में भी लालू के जेल जाने की आशंका के बीच पार्टी की कमान राबड़ी देवी को सौंपे जाने के खिलाफ थे। आज जब एक बार फिर लालू परिवार पर सीबीआई का शिकंजा कसता जा रहा है और समय से पहले संगठन चुनाव कराने का फैसला किया गया है। ऐसे में उन्होंने संगठन चुनाव से ठीक पहले बड़ा बयान देते हुए पार्टी पर ही सवाल उठाए हैं।

रघुवंश ने साफ शब्दों में कहा है कि राजद के अंदर कोई लोकतंत्र नहीं है। सब कुछ पहले से तय होता है। पार्टी में संगठन चुनाव तो केवल नाम का है, पार्टी में कौन किस पद पर रहेगा या होता है ये सब पहले से ही तय होता है। रघुवंश के इस बयान ने पूरी पार्टी को सकते में डाल दिया है और राजद प्रमुख लालू प्रसाद के लिए एक बार फिर गंभीर परेशानियों का दौर शुरू हो रहा है।

गुरुवार (पांच अक्टूबर) को राजद ने घोषणा की थी कि 19 अक्टूबर को उसकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी और राष्ट्रीय समिति की 20 नवंबर को और उसी दिन पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाएगा। लालू प्रसाद यादव 1997 में पार्टी की स्थापना के समय से ही इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। लालू यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए रखने के लिए पार्टी को अपना संविधान तक बदलना पड़ा था। पहले राजद के संविधान में यह व्यवस्था थी कि अदालत द्वारा सजा प्राप्त कोई भी व्यक्ति पार्टी अध्यक्ष नहीं हो सकता। लेकिन चारा घोटाले में लालू यादव को सीबीआई अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद ये नियम बदला गया। राजद अध्यक्ष के तौर पर लालू यादव का मौजूदा कार्यकाल 17 जनवरी 2019 को खत्म हो रहा है। पार्टी के अंदर एक धड़ा इस बात को लेकर चिंतित है कि अगर लालू यादव को फिर से जेल हो गयी तो पार्टी नेता विहीन हो जाएगी इसलिए अभी से एहतियातन किसी और को अध्यक्ष बनाना चाहिए।

राजद के एक विधायक ने बताया कि “फिर भी पार्टी अध्यक्ष परिवार के अंदर से ही होगा।” सूत्रों ने दावा किया गया है कि राजद के अंदर राबड़ी देवी या मीसा भारती को पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाएं चल रही हैं। लालू यादव जब पहली बार जेल गये थे तो वो अपनी जगह पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बनवा कर गये थे।

पर आज बिहार की जो राजनीतिक स्थितियां हैं, उनमें पहले की तरह अपनी पत्नी राबड़ी देवी के हाथों में दल की कमान सौंपकर लालू निश्चिंत नहीं हो सकते, क्योंकि अब उनके दल में भी पहले वाली बात नहीं रही कि वह जो कुछ कहेंगे या करेंगे, उसे उनके दल के सभी लोग चुपचाप मान लेंगे। अब तो कई मौकों पर उनके दल के नेताओं की अलग राय सामने आती है और यह लालू की मजबूरी है कि वह न तो कुछ कह सकते हैं और न ही कुछ कर पाते हैं। संभव है, कुछ नेता इसका विरोध करें और लालू को इसका राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़े।

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