अब प्रज्ञान घोटाले में फंसी रघुवर सरकार

लीजिये दो ही दिन पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दुमका में बयां दिया कि राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है लेकिन अब प्रज्ञान यूनिवर्सिटी के नए घोटाले ने झारखंड की राजनीति में सनसनी फैला दी है। फर्जी एमबीबीएस और एमडी डिग्री बेचते हुए गिरफ्तार हुए प्रज्ञान इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, झारखंड के चान्स्लर सुरेश कुमार अग्रवाल को जब बंगाल सीआईडी ने गिरफ्तार किया, तब जाकर इस शिक्षा घोटाले का पर्दाफाश हुआ।

यह घोटाला कोई नया नहीं है, इस विश्वविद्यालय की नीव ही घोटाले पर पड़ी। नियम है कि किसी नए विश्वविद्यालय की स्थापना अनुमति के लिए कम से कम 20 एकड़ जमीन चाहिए। राज्य में इक इंच जमीन तो छोडिये, एक लोकल ऑफिस तक प्रज्ञान फाउंडेशन का नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों के संरक्षण के बिना आखिर विभाग ने इसे अनुमति कैसे दी! कैसे केबिनेट ने इसे पास किया और कैसे इसे विधानसभा ने इसे पास भी कर दिया।

जेवीएम के एक प्रवक्ता ने कहा कि प्रज्ञान इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी का घोटाला यह साबित करता है कि राज्य में सत्ता सम्पोषित भ्रष्टाचार किस स्तर पर हो रहा है। अन्य निजी विश्वविद्यालय की अनुमति प्रक्रिया की भी अगर जाँच हो तो अरबों का भ्रष्टाचार उजागर होगा।

प्रज्ञान फाउंडेशन को 6 साल पहले जब युजीसी ने ब्लैकलिस्ट किया था तो सरकार ने कैसे बिना पात्रता को पूरा किये इसे अनुमति दे दी। यह एक ऐसा सवाल है जो सत्ता के शीर्ष पर ऊँगली उठाने पर सबको मजबूर कर रही है। मुख्यमंत्री रघुवर दास जब जीआईएस के लिए कोलकाता में रोड शो कर रहे थे तो यही सुरेश कुमार अग्रवाल वहाँ के उद्योगपतियों को सीएम से मिलवाने का काम कर रहे थे। तब हर सरकारी कार्यक्रम में बड़े हाकिम लोग प्रज्ञान फाउंडेशन का नाम लेते नहीं थकते थे। आज सब चुप हैं। उम्मीद है कि जल्द ही जाँच शुरू होगी और घोटालेबाजों का नाम सामने आएगा। कुछ भी हो विपक्ष को यह कहने का अवसर तो मिल ही गया कि दाग तो भाजपा सरकार की सियासत पर लग ही गया।

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