सियासी गढ़ में ऐतिहासिक भूल कर बैठे रघुवर दास

पिछले 6 दिसम्बर को गढ़वा में आयोजित बजट पूर्व संगोष्ठी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रघुवर दास की जुबान क्या फिसली की इस इलाके के सियासी दिग्गजों ने मुख्यमंत्री को घेरना शुरू कर दिया है. मुख्यमंत्री की यही राजनीतिक भूल भाजपा को महंगी पड़ सकती है. रघुवर दास का एक जाति विशेष को दिए बयान से इलाके का ब्राह्मण जमात जहां एक ओर खफा है. वहीं इस समाज से ताल्लुक रखने वाले ब्राह्मण नेताओं, कार्यकर्ताओं में भी रोष है. बीजेपी से जुड़े लोग भी मुख्यमंत्री के इस बयान को पचा नहीं पा रहे हैं.

कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला किया है. कहा है कि मुख्यमंत्री ने ऐसा बयान दे कर न सिर्फ संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाया है. बल्कि ब्राह्मणों पर सीधा हमला किया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को पलामू के राजनीतिक इतिहास की रत्ती भर भी जानकारी नहीं है. उन्होंने इन्दर सिंह नामधारी और गिरिनाथ सिंह के नामों का जिक्र करते हुए कहा कि इलाके में इनका जातीय आधार नहीं होने के बावजूद इनका सियासी कद पूरे राज्य में काफी बड़ा है. इसलिए मुख्यमंत्री ने सिर्फ ब्राह्मणों बल्कि पलामू की पूरी जनता का अपमान किया है.

वहीं इसी मुद्दे पर झामुमो के गढ़वा जिलाध्यक्ष विनोद तिवारी ने भी मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लिया है कहा है कि मुख्यमंत्री ने अपने पद का अपमान तो किया ही है, इसके साथ ही ब्राह्मणों का भी अपमान किया है. उन्होंने कहा है कि अगर इस जमात के मन में खोट होता तो वे इस इलाके से दूसरे नेताओं का राज्याभिषेक नहीं करते. एक खास जाति के खिलाफ बयान दे कर मुख्यमंत्री ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दी हैं.

इस क्षेत्र के राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले जानकारों की मानें तो मुख्यमंत्री के इस विवादित बयान से इलाके के ब्राह्मण मतदाता जो अभी तक भाजपा के समर्थन में गोलबंद हो रहे थे वे तो भड़केंगे ही साथ ही भाजपा का परंपरागत अपर कास्ट वोटर भी साथ छोड़ सकता है. और यदि ऐसा हुआ तो बीजेपी को बहुत महंगा पड़ सकता है. क्योंकि इस क्षेत्र का सियासी समीकरण ऐसा है कि जो भी पार्टी इस वर्ग को अपना ले उसका चुनाव जीतना तय है.

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